बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक बार फिर महागठबंधन के साथ जाने की अटकलें तेज हो गई हैं। उनकी हालिया गतिविधियों और राजद विधायक भाई वीरेंद्र के बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। भाई वीरेंद्र ने कहा, “नीतीश कुमार हमारे साथ आने वाले हैं, तो वह एनडीए की बैठक में क्यों शामिल होंगे?” इस बयान ने सियासी पारा चढ़ा दिया है।
शपथ ग्रहण समारोह में क्यों नहीं पहुंचे नीतीश?
नीतीश कुमार की गैरमौजूदगी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं गरम हैं, लेकिन इसके पीछे प्रशासनिक कारण बताए जा रहे हैं। उन्होंने बुधवार को रोहतास जिले में 1378.46 करोड़ रुपये की 1220 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। साथ ही, 1110.23 करोड़ रुपये की 1971 परियोजनाओं का शिलान्यास और 268.22 करोड़ रुपये की 249 परियोजनाओं का उद्घाटन किया।
कांग्रेस का नीतीश पर हमला
कांग्रेस नेता अलका लांबा ने भी इस मुद्दे पर तंज कसते हुए कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे। उन्होंने भाजपा पर महिला आरक्षण विधेयक के क्रियान्वयन में बाधा डालने का भी आरोप लगाया और बिहार में चुनाव से पहले एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की मांग की।
नीतीश कुमार की अगली राजनीतिक चाल क्या होगी, यह देखने लायक होगा, लेकिन इतना तय है कि बिहार की राजनीति एक बार फिर करवट लेने को तैयार है।