भारत से अमेरिका में आयात पर 16% के जवाबी टैरिफ के लागू होने में अब केवल एक सप्ताह शेष है। हालांकि, समझौते की संभावनाएं अभी भी बरकरार हैं। दोनों देशों के बीच कुछ संवेदनशील मुद्दों — जैसे डेयरी और कृषि उत्पादों पर अमेरिकी निर्यात — के कारण समझौता टल भी सकता है या सीमित दायरे में प्रारंभिक समझौता हो सकता है।
ट्रंप का आश्वासन: “भारत के साथ होगा टैरिफ में राहत वाला सौदा”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को दोहराया कि भारत और अमेरिका जल्द ही “बहुत कम टैरिफ” के साथ एक व्यापार समझौते पर पहुंचेंगे। उन्होंने कहा, “भारत किसी को भी स्वीकार नहीं करता, लेकिन मुझे लगता है कि अब वे तैयार हैं। यदि ऐसा होता है, तो हम प्रतिस्पर्धी माहौल के साथ एक विशेष समझौता करेंगे।”
डेयरी पर भारत का कड़ा रुख
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि डेयरी सेक्टर में किसी भी प्रकार का समझौता संभव नहीं है। यह क्षेत्र 8 करोड़ से अधिक भारतीयों को रोजगार देता है, जिनमें ज्यादातर छोटे किसान हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “डेयरी पर समझौते का कोई सवाल ही नहीं उठता। यह हमारी सीमा रेखा है।”
व्यापार वार्ता में देरी, भारत ने बढ़ाया प्रवास
वाशिंगटन में चल रही वार्ता में गतिरोध तोड़ने के लिए भारत के विशेष सचिव राजेश अग्रवाल ने अपना प्रवास एक दिन के लिए बढ़ा दिया है। यह वार्ता बुधवार तक जारी रहेगी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात करेंगे।
भारत को टेक्सटाइल, गहनों, चमड़ा, झींगा, प्लास्टिक और फलों जैसी श्रमिक-प्रधान वस्तुओं पर टैरिफ छूट की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, इन पर अमेरिका में घरेलू विरोध की संभावना नहीं है।
कृषि में रियायत मुश्किल, लेकिन व्यापार बढ़ाने का लक्ष्य बरकरार
भारत कृषि और डेयरी क्षेत्रों में छूट देने को तैयार नहीं है, क्योंकि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ सकता है। जबकि अमेरिका इन क्षेत्रों में रियायतें चाहता है, साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन, पेट्रोकेमिकल, वाइन, सेब, ट्री नट्स और जीएम फसलों पर भी।
व्यापार बढ़ाने का दीर्घकालिक लक्ष्य
दोनों देश बीटीए (Bilateral Trade Agreement) की पहली किस्त को सितंबर-अक्टूबर 2025 तक अंतिम रूप देने के प्रयास में हैं। इसका उद्देश्य 2030 तक व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक ले जाना है, जो कि वर्तमान में 191 बिलियन डॉलर है।