राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से एक रोमांचक और दर्दनाक खबर सामने आई है। पश्चिमी दिल्ली के मोहन गार्डन इलाके में दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा में तैनात 27 वर्षीय SWAT कमांडो काजल चौधरी को उनके ही घर में मार डाला गया।
काजल चार महीने की गर्भवती थीं और देश की सुरक्षा में तैनात एक बहादुर महिला सिपाही थीं।
घरेलू विवाद के दौरान हुआ हमला
आरोप है कि उनके पति अंकुर ने घरेलू विवाद के दौरान पहले उनका सिर दरवाजे के चौखट पर पटका और फिर डंबल से जानलेवा हमला किया।
काजल गंभीर रूप से घायल हुईं और कई अस्पतालों में इलाज के बावजूद उनकी हालत नाजुक रही। उन्हें अंततः गाजियाबाद के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ 5 दिनों तक जीवन और मृत्यु से जूझने के बाद 27 जनवरी को उनका निधन हो गया।
भयावह कॉल का खुलासा
काजल के भाई निखिल ने बताया कि घटना के दिन अंकुर ने उन्हें फोन किया और कहा:“अपनी बहन को समझा लो।”
काजल ने पहली बार अपने साथ हो रहे अत्याचार के बारे में खुलकर बताया। इसी बीच अंकुर ने फोन छीन लिया और कहा:“मैं तुम्हारी बहन को मार रहा हूं और पुलिस मेरा कुछ नहीं कर पाएगी।”
कुछ ही मिनट बाद अंकुर ने फिर फोन किया और कहा कि काजल मर गई है।
दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा का लंबा इतिहास
काजल के परिवार ने अंकुर और उसके रिश्तेदारों पर लंबे समय से दहेज उत्पीड़न और शारीरिक मानसिक यातना का आरोप लगाया।
शादी में बुलेट मोटरसाइकिल, सोने के गहने और नकद दिए गए थे।
काजल ने अपने पति की गाड़ी की व्यवस्था भी की, लेकिन अत्याचार रुके नहीं।
काजल और अंकुर की जान-पहचान कॉलेज के समय से थी, शादी 23 नवंबर 2023 को हुई।
दिसंबर 2024 में झगड़ों के कारण दंपति मोहन गार्डन के किराए के मकान में आ गए।
उनका डेढ़ साल का बेटा फिलहाल ननिहाल में है।
सामाजिक संदेश और फास्ट ट्रैक न्याय की जरूरत
काजल ने देश और समाज की सुरक्षा की कसम खाई थी, लेकिन अपने ही घर में पति की हैवानियत का शिकार बन गईं।
यह घटना यह दिखाती है कि:
दहेज और घरेलू हिंसा अब भी गंभीर समस्या हैं।
स्त्री को कई परिवारों में अब भी संपत्ति समझा जाता है, इंसान नहीं।
अपराधी खुलकर कह देता है कि पुलिस कुछ नहीं कर पाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले को फास्ट ट्रैक अदालत में सजा दिलाना जरूरी है, ताकि समाज को संदेश जाए कि दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा का अंजाम कड़ी सजा ही है।