मध्य प्रदेश के मंत्री कुंवर विजय शाह ने भारतीय सेना की वरिष्ठ अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई विवादास्पद टिप्पणी पर तीसरी बार सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगी है। यह माफ़ी ऐसे समय पर आई है जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री की पूर्व की माफ़ी को “अपर्याप्त” बताया था और सख्त नाराजगी जताई थी।
टिप्पणी के बाद बढ़ा विवाद, शाह लापता
15 मई को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद से मंत्री विजय शाह लापता हैं, जिससे उनके ठिकाने को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई 28 मई को करेगा।
“यह जुबान फिसलने की गलती थी” – शाह का वीडियो संदेश
विजय शाह ने शुक्रवार को एक वीडियो बयान जारी कर कहा:”जय हिंद, पहलगाम में हुए भीषण नरसंहार से मैं बहुत दुखी हूं। मेरे मन में हमेशा से भारतीय सेना और देश के लिए गहरा सम्मान रहा है। मेरी बातों से किसी भी समुदाय या धर्म को ठेस पहुंची है तो मैं क्षमा चाहता हूं। यह एक भाषाई त्रुटि थी, जिसका कोई गलत इरादा नहीं था।”
उन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी, सेना और देशवासियों से हाथ जोड़कर माफ़ी मांगी।
पहले भी दो बार मांग चुके हैं माफ़ी
यह तीसरी बार है जब शाह ने इस टिप्पणी पर सार्वजनिक रूप से खेद जताया है। इससे पहले वह विपक्ष, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की तीखी आलोचना झेल चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने इस सप्ताह शाह की माफ़ी को “मगरमच्छ के आंसू” बताते हुए उसे निष्ठाहीन कहा। अदालत ने टिप्पणी को “पूरी तरह से विचारहीन और बेहद दुर्भाग्यपूर्ण” बताया। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि एक मंत्री को समाज के लिए एक उच्च आदर्श स्थापित करना चाहिए।
SIT गठित, 28 मई तक देनी होगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम गठित की है, जिसमें कम से कम एक महिला अधिकारी शामिल है। टीम को 28 मई तक रिपोर्ट सौंपनी है।
कर्नल सोफिया कुरैशी: ऑपरेशन सिंदूर की अगुआ
कर्नल सोफिया कुरैशी ने विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ 7 मई को हुए ऑपरेशन सिंदूर की अगुवाई की थी। इस सैन्य कार्रवाई में भारत ने पाकिस्तान और पीओके में स्थित नौ आतंकी लॉन्च पैड को ध्वस्त किया और 100 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया। यह ऑपरेशन, पहलगाम की बैसरन घाटी में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले का जवाब था।