महात्मा गांधी के परपौत्र तुषार गांधी अपने विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने भाजपा और संघ परिवार के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिया, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है। केरल में भाजपा नेता और कार्यकर्ता उनके बयान के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं और गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस और वामपंथी दल उनके समर्थन में खड़े हैं।
दक्षिण भारत में भाजपा और आरएसएस की बढ़ती स्वीकार्यता के साथ ही संघ परिवार और सनातन धर्म पर हमले तेज हो गए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि एक सुनियोजित अभियान के तहत डर फैलाने की कोशिश हो रही है। केरल दौरे के दौरान तुषार गांधी ने जो बयान दिया, उससे यह साफ झलकता है कि इसे एक ‘टूलकिट’ की तरह आगे बढ़ाया जा रहा है।
तुषार गांधी ने क्या कहा?
तुषार गांधी ने कहा कि यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) और लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ), जो केरल में एक-दूसरे के विरोधी हैं, उन्हें यह समझने की जरूरत है कि एक और खतरनाक और कपटी दुश्मन उनके राज्य में प्रवेश कर चुका है—आरएसएस और भाजपा। उन्होंने कहा, “भाजपा को हराना संभव है, लेकिन आरएसएस एक जहर है। यदि यह हमारे राष्ट्र की धमनियों में फैल गया, तो सब कुछ समाप्त हो जाएगा।”
तुषार गांधी ने आरएसएस को देश में ‘कैंसर’ फैलाने वाला संगठन बताया। उन्होंने कहा, “राष्ट्र की आत्मा कैंसर से पीड़ित है और संघ परिवार इसे फैला रहा है।”
तुषार गांधी ने कहा- माफी नहीं मांगूंगा
तुषार गांधी के इस बयान से आरएसएस कार्यकर्ता भड़क उठे और विरोध प्रदर्शन करने लगे। भाजपा और आरएसएस कार्यकर्ताओं ने तुषार गांधी से माफी की मांग की और उनकी कार को भी रोका, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया।
हालांकि, तुषार गांधी ने स्पष्ट कर दिया कि वह अपने बयान पर कायम हैं और माफी नहीं मांगेंगे। उन्होंने कहा, “यह लड़ाई स्वतंत्रता संग्राम से भी अधिक महत्वपूर्ण है। संघ को बेनकाब करना जरूरी है।” तुषार गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि “मेरे परदादा (महात्मा गांधी) के हत्यारों के वंशज उनकी प्रतिमा के पास जाकर गोलियां चला सकते हैं, जैसा कि उन्होंने पहले किया था।”
केरल की राजनीति गर्माई
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने तुषार गांधी के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि “लोकतांत्रिक समाज में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने की इजाजत नहीं दी जा सकती।” वहीं, विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने तुषार गांधी के खिलाफ विरोध को महात्मा गांधी का अपमान बताया और इसे ‘फासीवादी’ मानसिकता का उदाहरण करार दिया। उन्होंने पुलिस और सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की।
वहीं, विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने तुषार गांधी के बयान को ‘नफरत से भरा’ बताया। भाजपा नेता वी मुरलीधरन ने आरोप लगाया कि तुषार गांधी महात्मा गांधी के नाम का आर्थिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा नेताओं ने मांग की कि उनके बयान के लिए उन्हें गिरफ्तार किया जाए।
पांच लोग गिरफ्तार
तुषार गांधी के खिलाफ नारेबाजी करने के आरोप में आरएसएस-भाजपा के पांच कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। इनमें भाजपा के नेय्याट्टिनकारा नगर पार्षद महेशन नायर, कृष्णकुमार, हरि कुमार, सूरज और अनूप शामिल हैं। हालांकि, पुलिस ने बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया। पुलिस ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
टीवी चैनलों पर दिखाए गए फुटेज में प्रदर्शनकारियों को तुषार गांधी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए देखा गया। उनकी मांग थी कि तुषार गांधी अपना बयान वापस लें, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वह अपने विचारों पर अडिग हैं।