NATIONAL THOUGHTS

A Web Portal Of Positive Journalism 

दिल्ली राजधानी बने रहे? शशि थरूर का प्रदूषण पर विवादित बयान

Share This Post

दिल्ली का प्रदूषण सर्दियों में एक बार फिर सुर्खियों में है। राजधानी और इसके आसपास के इलाके गैस चेंबर में बदल जाते हैं। नेताओं के बयान और प्रदूषण पर बहस तो जारी है, लेकिन समाधान की दिशा में ठोस कदम कम ही नजर आते हैं।

कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर  ने दिल्ली की बिगड़ती वायु गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए पूछा,  “क्या दिल्ली को भारत की राजधानी बने रहना चाहिए?”
एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए थरूर ने कहा कि दिल्ली की वायु गुणवत्ता दुनिया के दूसरे सबसे प्रदूषित शहर ढाका से पांच गुना खराब है।
उन्होंने दिल्ली की हवा को “रहने लायक नहीं” बताया और केंद्र सरकार पर वर्षों से इस समस्या को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

थरूर ने दिल्ली के प्रदूषण को लेकर व्यंग्यात्मक तरीके से सरकार को घेरा:
दिल्ली के लोकप्रिय स्थानों का नाम बदलकर ‘प्रदूषणकारी दिल्ली’, ‘धुआं खास’, ‘धुआं कुआं’  और  चांदनी चोक’ कहा।
“कोई आश्चर्य नहीं कि सरकार ने सड़क का नाम बदलकर  ‘मर्त्य पथ’  रख दिया,” उन्होंने तंज कसा।

दिल्ली के वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के ‘गंभीर प्लस’ श्रेणी में पहुंचने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया:
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और दिल्ली सरकार की कार्रवाई में देरी पर नाराजगी जताई।
अदालत ने  GRAP (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान)  के तहत चरण 4 प्रतिबंध तुरंत लागू करने का आदेश दिया।
दिल्ली-एनसीआर में स्कूलों ने मंगलवार से  ऑनलाइन कक्षाएं  शुरू करने का फैसला किया।

सोमवार को दिल्ली ने इस मौसम की सबसे खराब वायु गुणवत्ता 493 दर्ज की।
सर्दियों के दौरान दिल्ली अक्सर **दुनिया की सबसे प्रदूषित जगहों में शामिल हो जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वायु प्रदूषण के समाधान में सरकार की धीमी प्रगति गंभीर चिंता का विषय है।

शशि थरूर का बयान केवल एक चेतावनी है कि दिल्ली की स्थिति और गंभीर हो सकती है। प्रदूषण से निपटने के लिए सख्त कदम, केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय, और प्रभावी योजनाओं का क्रियान्वयन वक्त की जरूरत है। राजधानी के भविष्य को बचाने के लिए तत्काल प्रयास करना अनिवार्य है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *