जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने रियो डी जेनेरियो में महत्वपूर्ण मुलाकात की। यह मुलाकात अक्टूबर में भारत और चीन के बीच सीमा पर सैनिकों की वापसी के समझौते के बाद पहली बार हुई। बैठक में दोनों नेताओं ने सीमा विवाद, द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की।
जयशंकर ने कहा, “भारत-चीन सीमा पर एलएसी समझौते का जमीनी क्रियान्वयन योजना के अनुसार हो रहा है।”
दोनों देशों ने हाल ही में **सैनिकों की वापसी और सैन्य ढांचों को हटाने** में प्रगति की समीक्षा की।
जयशंकर ने कज़ान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की चर्चा को रेखांकित किया, जिसमें विदेश मंत्री स्तर की बैठक का सुझाव दिया गया था।
21 अक्टूबर को भारत और चीन ने सीमा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे लंबे समय से जारी गतिरोध समाप्त हुआ।
दोनों सेनाओं ने देपसांग और डेमचोक जैसे टकराव बिंदुओं से पीछे हटना शुरू किया।
सैनिकों और अस्थायी चौकियों को हटाकर पहले की स्थिति बहाल की जा रही है।
जयशंकर और वांग यी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत और चीन के योगदान पर चर्चा की।
दोनों देशों ने जी-20 और ब्रिक्स मंचों पर सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा, “चीन, भारत के साथ रणनीतिक विश्वास बढ़ाने और संचार व सहयोग को मजबूत करने के लिए तैयार है।”
समझौते ने सीमा पर शांति और स्थिरता बहाल करने में अहम भूमिका निभाई।
लद्दाख क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए दोनों देशों ने महत्वपूर्ण कदम उठाए।
बीजिंग और नई दिल्ली ने समझौते की शर्तों को पूरी तरह लागू करने का आश्वासन दिया।
भारत और चीन के बीच यह ऐतिहासिक समझौता और जी-20 के मंच पर हुई चर्चा, दोनों देशों के संबंधों में नए युग की शुरुआत को दर्शाते हैं। सीमा विवाद का समाधान और द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के प्रयास न केवल क्षेत्रीय शांति के लिए बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।