दिल्ली के लाल किला विस्फोट मामले में बड़ा खुलासा हुआ है।
विस्फोट स्थल से एकत्र किए गए **डीएनए नमूनों की जांच** में पुष्टि हुई है कि **जम्मू-कश्मीर के डॉ. उमर नबी** ही उस विस्फोटक से भरी i20 कार को चला रहे थे, जिसमें सोमवार शाम धमाका हुआ था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, उमर की मां के डीएनए नमूने लेकर उनकी तुलना विस्फोट स्थल से मिले अवशेषों से की गई, जिसके बाद यह पहचान सुनिश्चित हुई।
सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल का सदस्य था उमर
जाँच में सामने आया है कि डॉ. उमर नबी एक “**सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल**” का प्रमुख सदस्य था।
वह **जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के कोइल गाँव** का रहने वाला था और आतंकवादी संगठनों — **जैश-ए-मोहम्मद** और **अंसार गजवत-उल-हिंद** से जुड़ा था।
पुलिस ने इस मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए आठ लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें तीन डॉक्टर भी शामिल थे।
तीन राज्यों में फैला नेटवर्क और भारी विस्फोटक बरामद
एनआईए और दिल्ली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में **जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश** में फैले इस नेटवर्क का खुलासा हुआ।
छापेमारी के दौरान लगभग **3,000 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम क्लोरेट और सल्फर** जब्त किया गया — जो विस्फोट में इस्तेमाल होने वाला घातक मिश्रण था।
डॉक्टर, फर्जी पहचान और कट्टरपंथी कनेक्शन
सूत्रों के मुताबिक, डॉ. उमर **9 नवंबर से लापता** था। एक दिन पहले ही फरीदाबाद के गोदाम से 2,900 किलो अमोनियम नाइट्रेट बरामद हुआ था।
उसने **फर्जी पहचान पत्र** बनवाए, पाँच मोबाइल फोन बंद कर दिए और विश्वविद्यालय की ड्यूटी पर भी नहीं पहुँचा।
इस मामले में फरीदाबाद से गिरफ्तार **पूर्व व्याख्याता डॉ. शाहीन शाहिद** का नाम भी सामने आया है।
जांचकर्ताओं का मानना है कि वह **जैश-ए-मोहम्मद की महिला शाखा “जमात-उल-मोमिनात” की भारतीय इकाई की प्रमुख** बनने वाली थीं।
साथ ही, दो अन्य डॉक्टर — **मुज़म्मिल अहमद गनई और अजमुल अहमद मलिक** को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।
कथित तौर पर, **मौलवी इरफान** ने इन डॉक्टरों को कट्टरपंथ की राह पर डाला था, जिसके बाद **दक्षिण कश्मीर में कई छापेमारियां** की गईं।
एक शांत युवक कैसे बना आतंकी
पुलवामा के कोइल गाँव में उमर के परिजन उसे एक **शांत, अंतर्मुखी और पढ़ाकू युवक** बताते हैं।
लेकिन पुलिस सूत्रों का कहना है कि हाल के महीनों में उसका व्यवहार काफी बदल गया था।
वह **फरीदाबाद और दिल्ली के बीच लगातार यात्रा** कर रहा था और **रामलीला मैदान व सुनहरी मस्जिद के पास स्थित मस्जिदों** में देखा गया था।
विस्फोट वाले दिन, सीसीटीवी फुटेज में उसे दोपहर 3 बजे मस्जिद के पास कार पार्क करते हुए और बाद में लाल किला क्षेत्र की ओर जाते हुए देखा गया।
पुलिस ने उसके नाम से पंजीकृत एक **लाल रंग की फोर्ड इकोस्पोर्ट** भी जब्त की, जिसके दस्तावेज़ों में दर्ज दिल्ली का पता फर्जी निकला।
तुर्की कनेक्शन और वैश्विक आतंकी नेटवर्क से संबंध
जांच में पता चला है कि डॉ. उमर नबी और डॉ. मुज़म्मिल गनई **तुर्की की यात्रा** पर गए थे, जहाँ उनके संपर्क **विदेशी आतंकी हैंडलरों** से हुए।
संदेह है कि ये हैंडलर **टेलीग्राम समूहों** के माध्यम से भारत में “**डॉक्टर मॉड्यूल**” नामक नेटवर्क का संचालन कर रहे थे।
इन ग्रुप्स में से एक को पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद के हैंडलर **उमर बिन खत्ताब** संचालित कर रहा था।
अधिकारियों का मानना है कि इस समूह की योजना **दिवाली के दौरान मुंबई 2008 जैसे हमले** की थी, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने वक्त रहते साजिश को नाकाम कर दिया।
कई एजेंसियां अलर्ट पर
इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुँचने के लिए **दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच**, **जम्मू-कश्मीर पुलिस**, और **उत्तर प्रदेश एटीएस** सहित कई एजेंसियां सक्रिय हैं।
जाँचकर्ता अब इस मॉड्यूल से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश में देशभर में छापेमारी कर रहे हैं।