पिछले सप्ताह हुए भीषण एयर इंडिया विमान हादसे की जांच में एक अहम सफलता मिली है। जांचकर्ताओं ने कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) बरामद कर लिया है, जिससे दुर्घटना के कारणों का पता लगाने में मदद मिलेगी। यह वॉयस रिकॉर्डर अहमदाबाद से उड़ान भरने के कुछ देर बाद दुर्घटनाग्रस्त हुए बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान से मिला है।
उड़ान के तुरंत बाद हुआ हादसा
यह विमान लंदन जा रहा था और 12 जून को दोपहर 1:39 बजे अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से रवाना हुआ था। उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों में यह एक मेडिकल कॉलेज परिसर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दुर्घटना में कुल 270 लोगों की मौत हुई, जिनमें से अधिकांश यात्री थे। एक व्यक्ति चमत्कारिक रूप से जीवित बच गया।
शवों की पहचान डीएनए से
अधिकारियों के अनुसार, हादसे के चार दिन बाद तक 87 शवों की पहचान डीएनए मिलान के माध्यम से की जा चुकी है और 47 शव परिजनों को सौंपे गए हैं। शवों की हालत इतनी बुरी थी कि कई को पहचाना नहीं जा सका।
अतिरिक्त सिविल अधीक्षक डॉ. रजनीश पटेल ने जानकारी दी कि हादसे में जान गंवाने वाले लोग गुजरात के कई जिलों—भरूच, आनंद, जूनागढ़, भावनगर, वडोदरा, खेड़ा, मेहसाणा, अरवल्ली और अहमदाबाद—से थे।
29 अन्य की भी मौत, पांच छात्र भी शामिल
दुर्घटना में मारे गए 270 लोगों में से 241 यात्री थे, जबकि 29 अन्य लोगों में पांच एमबीबीएस छात्र भी शामिल हैं, जो मेडिकल कॉलेज परिसर में उपस्थित थे। यह हादसा ना केवल भारत के नागरिक उड्डयन इतिहास का सबसे बड़ा संकट बना, बल्कि कई परिवारों के लिए स्थायी दुख का कारण भी।