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“कैलाश मानसरोवर यात्रा: विदेश मंत्रालय की जरूरी एडवाइजरी जारी, पहला जत्था सिक्किम पहुंचा”

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पांच वर्षों के निलंबन के बाद नाथू ला दर्रे (सिक्किम) के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा एक बार फिर शुरू हो गई है। यह यात्रा धार्मिक आस्था और भारत-चीन सांस्कृतिक संबंधों के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

पहला जत्था गंगटोक पहुंचा

विदेश मंत्रालय द्वारा अनुमोदित 36 श्रद्धालुओं का पहला जत्था सिक्किम की राजधानी गंगटोक पहुंच चुका है। सोमवार को ये तीर्थयात्री acclimatization के लिए ‘17 माइल’ क्षेत्र में रुके और 20 जून को भारत-चीन सीमा पार करेंगे। इसमें विदेश मंत्रालय के दो अधिकारी भी शामिल हैं।

यात्रा मार्ग और संगठन

श्रद्धालु नाथू ला दर्रे से होते हुए तिब्बत के शिगात्से शहर, फिर कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील तक पहुंचेंगे।

इस साल 750 भारतीय श्रद्धालु यात्रा करेंगे

500 नाथू ला मार्ग से (10 जत्थों में)

250 लिपुलेख दर्रे (उत्तराखंड) से
यात्रा की संपूर्ण ज़िम्मेदारी सिक्किम पर्यटन विकास निगम (STDC) और संबंधित राज्य एजेंसियों की है।

यात्रा का महत्व

कैलाश पर्वत को हिंदू धर्म में भगवान शिव का निवास माना जाता है। यह यात्रा जैन और बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए भी धार्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

यात्रियों के लिए जरूरी सलाह

 स्वास्थ्य और जांच

यात्रा शुरू करने से पहले यात्रियों को दिल्ली में 3-4 दिन रुकना होगा।

मेडिकल टेस्ट – दिल्ली हार्ट एंड लंग इंस्टीट्यूट (DHLI) और ITBP द्वारा किया जाएगा।

पहले से कुछ सामान्य जांच करा लेना लाभदायक हो सकता है, लेकिन ये आधिकारिक नहीं मानी जाएंगी।

कठिन ट्रेकिंग

यात्रा में 19,500 फीट की ऊंचाई, खराब मौसम और कठिन रास्तों से गुजरना होता है।

केवल शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ लोग ही आवेदन करें।

महत्वपूर्ण निर्देश और जिम्मेदारियां

यह यात्रा पूरी तरह यात्री की अपनी इच्छा, जोखिम और खर्च पर होती है।

सरकार किसी दुर्घटना, मृत्यु या संपत्ति की हानि के लिए उत्तरदायी नहीं होगी।

चीन में मृत्यु की स्थिति में, शव भारत लाने का दायित्व सरकार का नहीं होगा, इसके लिए पहले से सहमति पत्र पर हस्ताक्षर आवश्यक है।

प्रबंधन और संचालन

यात्रा का आयोजन विदेश मंत्रालय द्वारा, उत्तराखंड/सिक्किम सरकार, ITBP, KMVN (उत्तराखंड) और STDC (सिक्किम) के सहयोग से किया जाता है।

किसी NGO या निजी संगठन को मंत्रालय द्वारा अधिकृत नहीं किया गया है।

कानूनी स्थिति

यात्रा से जुड़े सभी विवादों का समाधान केवल दिल्ली न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र में होगा।

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