रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार शाम दो दिन के राज्य दौरे पर नई दिल्ली पहुँचे। यह यात्रा लगभग आठ दशकों पुरानी भारत-रूस साझेदारी को और मजबूत करने वाली मानी जा रही है।
पालम एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुतिन का आलिंगन कर स्वागत किया और दोनों एक ही वाहन से 7, लोक कल्याण मार्ग पहुँचें। यहां PM मोदी ने उनके सम्मान में प्राइवेट डिनर आयोजित किया। यह मेहमाननवाज़ी पिछली जुलाई में मोदी की मॉस्को यात्रा के दौरान पुतिन द्वारा दिए गए सम्मान की प्रत्युत्तर स्वरूप थी।
भू-राजनीतिक पृष्ठभूमि और दौरे का महत्व
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव देखा जा रहा है। इसलिए पुतिन की यह दिल्ली यात्रा रणनीतिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
शुक्रवार की सुबह राष्ट्रपति भवन में उनका औपचारिक स्वागत समारोह होगा। इसके बाद दोनों देशों के बीच शिखर वार्ता निर्धारित है, जिसमें कई समझौते होने की संभावना है।
डिप्लोमैटिक शेड्यूल — बैठकें, लंच और समिट
हैदराबाद हाउस में वर्किंग लंच का आयोजन
पुतिन का राजघाट जाकर श्रद्धांजलि देने का कार्यक्रम
समिट के बाद रूस के सरकारी ब्रॉडकास्टर के नए इंडिया चैनल का लॉन्च
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से आयोजित राजकीय भोज में उपस्थिति
दिनभर की मीटिंग्स और समारोहों के बाद पुतिन के शुक्रवार रात तक भारत से रवाना होने की उम्मीद है।
ट्रेड, ऊर्जा और तेल पर फोकस
वार्ता में विशेष रूप से ऊर्जा और कच्चे तेल व्यापार पर चर्चा होने की संभावना है।
भारत द्वारा रूस से बड़े पैमाने पर तेल आयात किए जाने के बावजूद ट्रेड डेफिसिट बढ़ रहा है, जिसके समाधान पर नई दिल्ली जोर दे सकती है।
इसके अलावा, अमेरिकी प्रतिबंधों और बढ़े हुए आयात शुल्क के कारण भारत-US संबंधों में आई दूरी भी बातचीत का केंद्र हो सकती है। रूस की ओर से संकेत दिए गए हैं कि पश्चिमी प्रतिबंधों के प्रभाव के चलते कुछ समय के लिए भारत को तेल आपूर्ति कम हो सकती है, लेकिन सप्लाई बढ़ाने के प्रयास भी जारी हैं।
यूक्रेन मुद्दा भी एजेंडे में
मोदी और पुतिन की वार्ता के दौरान यूक्रेन संघर्ष पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। भारत लगातार कहता रहा है कि शांति के लिए संवाद और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है।
समिट के बाद कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर की संभावना है, जिनमें—
भारतीय वर्कर्स के रूस आने-जाने को सरल बनाने पर अनुबंध
रक्षा सहयोग के तहत लॉजिस्टिक सपोर्ट समझौता
फार्मा, एग्रीकल्चर, खाद्य उत्पाद और कंज्यूमर गुड्स निर्यात में बढ़ोतरी जैसे प्रस्ताव शामिल हो सकते हैं।