पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख ममता बनर्जी ने आज कोलकाता में ‘शहीद दिवस’ रैली के माध्यम से 2026 विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान की औपचारिक शुरुआत की। इस रैली के जरिए ममता बनर्जी ने बंगाली अस्मिता को केंद्र में रखकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ‘हिंदुत्व राजनीति’ के खिलाफ मोर्चा खोलने के संकेत दिए।
बंगाली अस्मिता और प्रवासियों की चिंता पर BJP को घेरा जाएगा
टीएमसी सूत्रों के अनुसार, ममता अपने भाषण में विशेष रूप से उन राज्यों में रह रहे बंगाली भाषी प्रवासियों की स्थिति पर भी चिंता जताएंगी, जहाँ उन्हें कथित रूप से नजरबंद किया जा रहा है। पार्टी इसे भाजपा की “एक भाषा, एक पहचान” नीति का विरोध मानती है।
कोलकाता में यातायात पर व्यापक प्रतिबंध लागू
रैली को लेकर कोलकाता पुलिस ने विशेष सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के व्यापक इंतज़ाम किए हैं। धर्मतला क्षेत्र में सुबह 8 बजे से पहले और 11 बजे के बाद ही जुलूसों की अनुमति दी गई है। साथ ही सुबह 4 बजे से रात 9 बजे तक यात्री वाहनों के कई मार्गों पर रोक लगाई गई है।
शहीद दिवस का ऐतिहासिक महत्व
टीएमसी हर साल 21 जुलाई को ‘शहीद दिवस’ मनाती है। यह दिन 1993 में पुलिस गोलीबारी में मारे गए युवा कांग्रेस के 13 कार्यकर्ताओं की स्मृति में आयोजित किया जाता है। उस समय ममता बनर्जी खुद युवा कांग्रेस की नेता थीं और इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही थीं, जिसमें मतदाता पहचान पत्र को अनिवार्य दस्तावेज बनाए जाने की मांग की गई थी।
टीएमसी के लिए ‘राजनीतिक विरासत’ का प्रतीक
1998 में तृणमूल कांग्रेस के गठन के बाद से यह दिन पार्टी की विचारधारा और वामपंथ विरोधी राजनीति की विरासत को मजबूत करने का प्रतीक बन गया है। यह आयोजन टीएमसी को माकपा के खिलाफ अपने संघर्ष की याद दिलाने और बंगाल की राजनीति में अपनी जड़ें और गहरी करने का मौका देता है।
हजारों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी, भावनात्मक अपील
शहीद दिवस रैली में भाग लेने के लिए एस्प्लेनेड ईस्ट मैदान में हजारों टीएमसी समर्थकों की भीड़ उमड़ी। टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर 1993 की घटना को याद करते हुए लिखा:”21 जुलाई सिर्फ़ एक तारीख़ नहीं है, यह अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक है। गोलियाँ शरीर को भेद सकती हैं, विचारधारा को नहीं। 13 युवाओं की शहादत ने एक ऐसे आंदोलन को जन्म दिया जिसने बंगाल और देश की दिशा बदली।”
राजनीतिक संदेश: BJP के खिलाफ TMC का ‘बंगाली गौरव’ कार्ड
शहीद दिवस रैली के मंच से ममता बनर्जी न केवल भाजपा की नीतियों की आलोचना करेंगी, बल्कि बंगाली पहचान और संस्कृति को केंद्र में रखकर ‘बाहरी ताकतों’ के खिलाफ एकजुटता की भावना भी जागृत करने का प्रयास करेंगी। यह रैली बंगाल की राजनीति में भावनात्मक, सांस्कृतिक और चुनावी महत्व रखती है।