मां कालरात्रि की पूजा विधि:
ब्रह्म मुहूर्त में प्रातः स्नान करें:
सप्तमी तिथि को, आपको ब्रह्म मुहूर्त के समय प्रातः स्नान करना चाहिए।
घी का दीपक जलाएं:
स्नान के बाद, माता के सामने घी का दीपक जलाएं और उसे लाल रंग के फूलों से सजाएं।
नैवेद्य का अर्पण:
मां कालरात्रि की पूजा में मिष्ठान, पंचमेवा, पांच प्रकार के फल, अक्षत, धूप, गंध, पुष्प और गुड़ का नैवेद्य अर्पण किया जाता है। इस दिन, गुड़ का विशेष महत्व है, इसलिए मां कालरात्रि को गुड़ या उससे बने पकवान का भोग भी लगाया जाता है।
मंत्रों का जाप और आरती:
पूजा समाप्त होने के बाद, माता के मंत्रों का जाप करें और उनकी आरती करें। आप दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ भी कर सकते हैं।
मां कालरात्रि का स्वरूप:
मां कालरात्रि को काला शरीर, अंधकार की तरह, और ब्रह्माण्ड के तरह विशाल गोल नेत्रों वाली देवी के रूप में जाना जाता है। वे भय को दूर करने और भक्तों पर अनुकम्पा करने वाली हैं।
मां कालरात्रि की पूजा का महत्व:
सप्तमी की रात्रि को सिद्धियों की रात कहा जाता है, जिसमें देवी की पूजा से रोग का नाश होता है और शत्रुओं पर विजय मिलती है। इसलिए, ग्रह बाधा और भय को दूर करने वाली माता की पूजा को नवरात्रि के सातवें दिन करना बहुत महत्वपूर्ण है।
इस विशेष दिन को मां कालरात्रि की पूजा के रूप में मनाने से आप आपके जीवन में सुख, समृद्धि, और आनंद की प्राप्ति कर सकते हैं।
ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊँ कालरात्रि दैव्ये नम: .