नई दिल्ली,(नेशनल थॉट्स ) – 21 October को हम शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन का आदर कर रहे हैं, जिसमें हम मां कालरात्रि की पूजा करते हैं। मां कालरात्रि का स्वरूप दर्शाते समय वह भयंकर लगती है, लेकिन वास्तव में वह भक्तों को शुभ फल प्रदान करने वाली है। इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है। मां कालरात्रि का वाहन एक गधा है, जिसे सबसे मेहनती माना जाता है। मां कालरात्रि पृथ्वीलोक का विचरण इस गधे पर करती हैं। मां कालरात्रि की पूजा से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और इनकी पूजा से सभी दुखों और पापों का नाश होता है। उनकी आरती और मंत्र जपने से जीवन में खुशियाँ आती हैं। मां कालरात्रि आरती इस प्रकार है-
मां कालरात्रि की आरती
कालरात्रि जय-जय-महाकाली ।
काल के मुह से बचाने वाली ॥
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा ।
महाचंडी तेरा अवतार ॥
पृथ्वी और आकाश पे सारा ।
महाकाली है तेरा पसारा ॥
खडग खप्पर रखने वाली ।
दुष्टों का लहू चखने वाली ॥
कलकत्ता स्थान तुम्हारा ।
सब जगह देखूं तेरा नजारा ॥
सभी देवता सब नर-नारी ।
गावें स्तुति सभी तुम्हारी ॥
रक्तदंता और अन्नपूर्णा ।
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना ॥
ना कोई चिंता रहे बीमारी ।
ना कोई गम ना संकट भारी ॥
उस पर कभी कष्ट ना आवें ।
महाकाली मां जिसे बचाबे ॥
तू भी भक्त प्रेम से कह ।
कालरात्रि मां तेरी जय ॥