भारत-चीन संबंधों में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कज़ान में हुई बातचीत के सकारात्मक परिणाम अब ज़मीन पर दिखने लगे हैं। इसी के तहत वर्ष 2020 से बंद पड़ी कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू किया जा रहा है।
विदेश मंत्रालय ने की आधिकारिक घोषणा
विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को घोषणा की कि भारत और चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने का फैसला किया है। यह यात्रा 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित कर दी गई थी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में बताया, “कैलाश मानसरोवर यात्रा इस वर्ष (2025) फिर से शुरू होगी और इसकी तैयारियां चल रही हैं। हम जल्द ही इसके संबंध में सार्वजनिक सूचना जारी करेंगे।”
भक्तों के लिए फिर खुलेगा पवित्र मार्ग
जायसवाल ने यह भी कहा कि हज़ारों श्रद्धालु इस पवित्र तीर्थ यात्रा के पुनः आरंभ होने का इंतजार कर रहे हैं। यात्रा का फिर से शुरू होना धार्मिक आस्था के साथ-साथ दोनों देशों के बीच संबंधों को भी नया आयाम देगा।
सीधी उड़ानों पर बनी सहमति
कैलाश मानसरोवर यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए भारत और चीन सीधी उड़ानों के संचालन पर भी सहमत हो गए हैं।
जनवरी 2025 में भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री की बीजिंग यात्रा के दौरान यह सहमति बनी थी कि दोनों देशों के नागरिक विमानन प्राधिकरण मिलकर तकनीकी ढांचे पर काम करेंगे।
जायसवाल के अनुसार: “सैद्धांतिक रूप से दोनों देश सीधी उड़ान सेवाओं को पुनः शुरू करने पर सहमत हो चुके हैं। दोनों पक्षों की तकनीकी टीमें इस दिशा में कार्यरत हैं।”
तकनीकी स्तर पर जारी है बातचीत
सीधी उड़ानों के संचालन के लिए एक अद्यतन ढांचे की आवश्यकता है। दोनों देशों के नागरिक उड्डयन विभाग इस पर चर्चा कर रहे हैं। अभी इसकी कोई तय समय-सीमा नहीं है, लेकिन जायसवाल के अनुसार “चीज़ें सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं।”
वीजा पर भी हो रही है चर्चा
भारत और चीन के बीच वीजा नीति को लेकर भी बातचीत चल रही है। जायसवाल ने बताया कि दोनों देशों के बीच आपसी संपर्क, सीधी उड़ानें और तीर्थयात्रा जैसे मुद्दों पर भी बातचीत हुई है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि वीजा व्यवस्था में भी जल्द सहूलियत मिलेगी।
धार्मिक और कूटनीतिक दृष्टि से अहम यात्रा
कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म के श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है। यात्रा के फिर से शुरू होने से न सिर्फ धार्मिक भावनाओं को बल मिलेगा, बल्कि भारत-चीन के बीच पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और जनता-जनता के संबंध भी मजबूत होंगे।
यह यात्रा ऐसे समय में बहाल हो रही है जब दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं — यह एक सकारात्मक संकेत है जो आपसी समझ और सार्वजनिक कूटनीति को आगे बढ़ा सकता है।