ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान को तुर्की के समर्थन के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया ने बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने तुर्की के शैक्षणिक संस्थानों के साथ किए गए सभी समझौता ज्ञापनों (MoUs) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
पीआरओ प्रोफेसर साइमा सईद ने कहा, “जामिया भारत सरकार और राष्ट्र के साथ खड़ा है।”
जेएनयू ने भी पहले उठाया था कदम
इससे पहले जेएनयू ने भी तुर्की के इनोनू विश्वविद्यालय के साथ 3 फरवरी 2025 को हुए समझौते को सुरक्षा कारणों से रद्द कर दिया था। कुलपति शांतिश्री धुलीपुडी पंडित ने कहा कि तुर्की का पाकिस्तान को खुला समर्थन अनदेखा नहीं किया जा सकता।
जनता का भी बढ़ा विरोध, यात्रा बहिष्कार की शुरुआत
तुर्की और अज़रबैजान के पाकिस्तान के प्रति समर्थन के चलते आम जनता में भी गुस्सा है। सोशल मीडिया पर इन दोनों देशों का अनौपचारिक बहिष्कार शुरू हो गया है।
ट्रैवल प्लेटफॉर्म जैसे मेकमाईट्रिप और ईजमाईट्रिप ने तुर्की और अज़रबैजान के लिए यात्रा बुकिंग रद्दीकरण में वृद्धि दर्ज की है। उपयोगकर्ताओं ने इसे दोनों देशों के “भारत विरोधी रुख” से जोड़ा है।
शैक्षणिक और सामाजिक स्तर पर भारत की प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि पाकिस्तान के साथ खड़े होने वाले देशों को अब साफ़ चेतावनी मिल रही है। जामिया और जेएनयू जैसे संस्थानों की यह कार्रवाई आने वाले समय में और व्यापक प्रभाव डाल सकती है।