अमेरिका ने ईरान की तीन परमाणु साइटों पर हवाई हमला किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खलबली मच गई। इन हमलों के बाद न्यूक्लियर फॉलआउट और रेडिएशन लीक की खबरें सामने आईं, लेकिन ईरान ने सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और कोई खतरा नहीं है।
ट्रंप का दावा और अमेरिकी अधिकारियों की असहमति
हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि हवाई हमलों से ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह नष्ट हो चुका है, लेकिन अमेरिकी रक्षा अधिकारी इस पर स्पष्ट नहीं हैं।
रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन कैन ने बताया कि बी-2 बॉम्बर्स और टॉमहॉक मिसाइलों से तीन मुख्य साइटों पर गहरा नुकसान जरूर पहुंचा है, लेकिन फोर्डो यूरेनियम संवर्धन संयंत्र पूरी तरह नष्ट नहीं हुआ।
फोर्डो साइट पर बंकर बस्टर बमों से भारी नुकसान
उल्लेखनीय है कि फोर्डो साइट पर अमेरिका ने 30,000 पाउंड वजनी बंकर बस्टर बम गिराए, जिससे वहां कई गहरे गड्ढे बन गए। इजराइली सेना की रिपोर्ट के अनुसार, साइट को गंभीर क्षति पहुंची है लेकिन वह पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
ईरान ने पहले ही हटा लिया था 880 पाउंड यूरेनियम
NYT की रिपोर्ट के अनुसार, दो इजराइली अधिकारियों ने बताया कि हमलों से पहले ईरान साइट से संवेदनशील उपकरण और 60% तक समृद्ध 400 किलोग्राम (करीब 880 पाउंड) यूरेनियम हटा चुका था।
यह स्तर हथियार-योग्य यूरेनियम से थोड़ा कम होता है, लेकिन परमाणु हथियार निर्माण की दिशा में एक गंभीर कदम माना जाता है।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसी का खुलासा
IAEA के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने बताया कि निरीक्षकों ने आखिरी बार इस यूरेनियम को हमले से एक सप्ताह पहले देखा था। उन्होंने कहा कि ईरान ने इसे छिपाया नहीं है बल्कि इसकी सुरक्षा की है। यानी अमेरिका द्वारा की गई कार्रवाई के बावजूद यह सामग्री अभी भी ईरान के नियंत्रण में है।
ट्रंप की दुविधा और इजरायल की बढ़ती भूमिका
ट्रंप प्रशासन इस सैन्य कार्रवाई में अमेरिका की आगे की भूमिका पर चर्चा कर रहा था। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप निजी बैठकों में इजरायल के अभियान में साझेदारी को लेकर इच्छुक दिखे। वहीं उनके राजनयिक दूत स्टीव विटकॉफ अब भी कूटनीतिक रास्ता तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।