कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तुलना जैश-ए-मोहम्मद और तालिबान से करते हुए विवादित बयान दिया है। सोमवार को बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि तीनों संगठन भारत में रजिस्टर्ड नहीं हैं।
हरिप्रसाद ने कहा कि जैश-ए-मोहम्मद, तालिबान और RSS में अंतर नहीं है, क्योंकि उनके अनुसार तीनों भारत में पंजीकृत संगठन नहीं हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।
वंदे मातरम और राष्ट्रगान का भी किया जिक्र
हरिप्रसाद ने वंदे मातरम विवाद को लेकर केरल के वाइस चांसलर मोहनन कुन्नुम्मल की टिप्पणियों का भी हवाला दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि RSS के सदस्य वंदे मातरम और राष्ट्रगान नहीं गाते तथा तिरंगा नहीं फहराते। उनके ये बयान ऐसे समय में आए हैं, जब स्वतंत्रता दिवस पर वंदे मातरम गाए जाने के दौरान कथित तौर पर बाधा डालने को लेकर कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज होने की बात सामने आई है।
RSS को लेकर पहले भी उठे सवाल
RSS के कानूनी रजिस्ट्रेशन को लेकर बहस उस समय और तेज हो गई, जब भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष ने हिंदू जागरण वेदिके के एक कार्यक्रम में संगठन के पंजीकरण पर अपनी बात रखी।
संतोष ने कहा कि RSS को कानूनी रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं है। उनके मुताबिक संगठन की पहचान केवल कागजी दस्तावेजों से नहीं, बल्कि जनता के विश्वास से होती है।
उन्होंने कहा कि RSS वर्ष 1925 से काम कर रहा है और विभाजन जैसे कठिन दौर में भी उसने बिना किसी सरकारी सर्टिफिकेशन के देश के लिए काम किया।
प्रियांक खड़गे ने पूछे पांच सवाल
RSS के रजिस्ट्रेशन को लेकर चल रही बहस के बीच कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने भी सवाल उठाए। उन्होंने RSS से उसकी कानूनी और वित्तीय व्यवस्था को लेकर स्पष्टीकरण मांगा।
खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पांच प्रमुख सवाल उठाए—
RSS किस कानून के तहत काम करता है?
देशभर में RSS की संपत्तियों का मालिक कौन है?
संगठन के बैंक खाते किसके नाम पर संचालित होते हैं?
गुरुदक्षिणा और अन्य दान कहां और किस व्यवस्था के तहत प्राप्त किए जाते हैं?
संगठन के ऑडिट किए गए खाते और टैक्स फाइलिंग कहां हैं?
खड़गे ने पारदर्शिता पर दिया जोर
प्रियांक खड़गे ने कहा कि संगठन का इतिहास उसकी कानूनी पारदर्शिता का विकल्प नहीं हो सकता। उन्होंने तर्क दिया कि जैसे-जैसे किसी संगठन का प्रभाव बढ़ता है, वैसे-वैसे जनता के प्रति उसकी जवाबदेही भी बढ़नी चाहिए।
बयान से बढ़ी राजनीतिक बहस
बी.के. हरिप्रसाद की RSS को जैश-ए-मोहम्मद और तालिबान से जोड़ने वाली टिप्पणी ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। एक ओर कांग्रेस नेता RSS के पंजीकरण और उसकी कानूनी स्थिति पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं भाजपा की ओर से संगठन के लंबे इतिहास और सामाजिक स्वीकार्यता का हवाला दिया जा रहा है।
अब विवाद केवल RSS के रजिस्ट्रेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठन की कानूनी स्थिति, संपत्तियों, वित्तीय पारदर्शिता और राजनीतिक भूमिका को लेकर भी बहस तेज हो गई है।