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योगी आदित्यनाथ: ‘बुलडोजर बाबा’ बनने तक का सफर

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज, 5 जून को अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं। हिंदुत्व की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल योगी आदित्यनाथ ने गोरक्षपीठ के महंत से लेकर देश के सबसे चर्चित मुख्यमंत्रियों में अपनी पहचान बनाई है। कानून-व्यवस्था, माफिया विरोधी कार्रवाई और विकास योजनाओं को लेकर उनकी कार्यशैली ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में एक अलग स्थान दिलाया है।

उत्तराखंड के पंचूर गांव से शुरू हुआ सफर

योगी आदित्यनाथ का जन्म उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के पंचूर गांव में एक गढ़वाली राजपूत परिवार में हुआ था। उनका मूल नाम अजय सिंह बिष्ट है। उनके पिता का नाम आनंद सिंह बिष्ट और माता का नाम सावित्री देवी है।

उन्होंने गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित विषय में स्नातक (बीएससी) की पढ़ाई की। छात्र जीवन के दौरान ही उनका रुझान सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों की ओर बढ़ा और इसी क्रम में वे गोरखपुर पहुंचे।

अजय बिष्ट से बने योगी आदित्यनाथ

15 फरवरी 1994 को उन्होंने गोरक्षपीठाधीश्वर ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ से दीक्षा ग्रहण की। दीक्षा के बाद उनका नाम अजय बिष्ट से बदलकर योगी आदित्यनाथ हो गया। इसके बाद उन्होंने गोरक्षपीठ की धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की।

26 साल की उम्र में बने सांसद

योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक सफर 1990 के दशक में शुरू हुआ। वर्ष 1996 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपने गुरु महंत अवेद्यनाथ के चुनाव अभियान का संचालन किया।

साल 1998 में महंत अवेद्यनाथ ने उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया और गोरखपुर से लोकसभा चुनाव लड़ने का अवसर दिया। मात्र 26 वर्ष की उम्र में चुनाव जीतकर योगी आदित्यनाथ उस समय देश के सबसे युवा सांसदों में शामिल हो गए।

गोरक्षपीठ और शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी

गुरु गोरक्षनाथ मंदिर के उत्तराधिकारी बनने के बाद योगी आदित्यनाथ पर गोरक्षपीठ के संचालन के साथ-साथ महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद द्वारा संचालित स्कूलों और कॉलेजों की जिम्मेदारी भी रही। उन्होंने धार्मिक, सामाजिक और शैक्षिक गतिविधियों के माध्यम से पूर्वांचल में अपनी मजबूत पहचान बनाई।

भाजपा में बढ़ता गया राजनीतिक कद

2007 के विधानसभा चुनाव और 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के भीतर कई राजनीतिक चुनौतियां सामने आईं। इस दौर में योगी आदित्यनाथ ने संगठन के भीतर अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई।

पूर्वी उत्तर प्रदेश और खासकर पूर्वांचल में उनके प्रभाव और जनाधार ने भाजपा को मजबूती दी। समय के साथ पार्टी में उनका कद लगातार बढ़ता गया और वे भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए।

2017 में संभाली उत्तर प्रदेश की कमान

2014 के लोकसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ ने भाजपा के स्टार प्रचारक के रूप में कई राज्यों में चुनाव प्रचार किया। इसके बाद 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के बाद 19 मार्च 2017 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे, निवेश और विकास परियोजनाओं को प्राथमिकता दी। माफिया और अवैध कब्जों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई के कारण उन्हें ‘बुलडोजर बाबा’ के नाम से भी पहचान मिली।

2022 में दोबारा सत्ता में वापसी

2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लगातार दूसरी बार उत्तर प्रदेश में सरकार बनाई। यह राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी गई।

पूर्वांचल समेत प्रदेश के कई क्षेत्रों में भाजपा के मजबूत प्रदर्शन का श्रेय भी योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और संगठनात्मक क्षमता को दिया गया।

राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ता प्रभाव

योगी आदित्यनाथ आज भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में उनकी लोकप्रियता और राजनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ा है।

समर्थकों के बीच उनकी छवि एक सशक्त प्रशासक और निर्णायक नेता की है। यही कारण है कि राष्ट्रीय राजनीति में भी उनकी भूमिका को लेकर समय-समय पर चर्चाएं होती रहती हैं।

राजनीति और प्रशासन का अनूठा संगम

महंत से मुख्यमंत्री तक का योगी आदित्यनाथ का सफर धार्मिक नेतृत्व, जनसेवा और राजनीति का अनूठा संगम माना जाता है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनका प्रभाव लगातार बढ़ रहा है और वे राज्य के सबसे चर्चित नेताओं में से एक बने हुए हैं।

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