सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को यासीन मलिक के मुकदमे को जम्मू से तिहाड़ जेल की अदालत में स्थानांतरित करने की CBI की याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी। अब इस मामले की सुनवाई 7 मार्च को होगी। अदालत ने निर्देश दिया कि मलिक को वीडियो कॉन्फ्रेंस (VC) के जरिए कार्यवाही में शामिल किया जाए।
कौन-कौन से मामले में मुकदमे का सामना कर रहे हैं यासीन मलिक?
यासीन मलिक पर 1990 में चार भारतीय वायुसेना कर्मियों की हत्या और 1989 में जम्मू-कश्मीर के पूर्व गृह मंत्री की बेटी रुबैया सईद के अपहरण में शामिल होने के आरोप हैं।
रुबैया सईद को अपहरण के पांच दिन बाद छोड़ा गया था, जब तत्कालीन वीपी सिंह सरकार ने पांच आतंकवादियों को रिहा किया था।
रुबैया सईद अब तमिलनाडु में रहती हैं और CBI के लिए अभियोजन पक्ष की गवाह हैं।
CBI ने मलिक की व्यक्तिगत उपस्थिति पर जताई आपत्ति
मलिक को मई 2023 में टेरर फंडिंग मामले में दोषी ठहराया गया था और तब से वह तिहाड़ जेल में बंद हैं। टाडा अदालत ने मलिक की व्यक्तिगत उपस्थिति के लिए समन जारी किया था, लेकिन CBI ने इसका विरोध किया।
CBI का तर्क था कि:
मलिक की जम्मू-कश्मीर यात्रा से क्षेत्र में अशांति फैल सकती है।
गवाहों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्यों अहम?
सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा चिंताओं और निष्पक्ष सुनवाई के मद्देनजर यह फैसला लिया कि मलिक को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया जाएगा। इससे एक तरफ मामले की सुनवाई जारी रह सकेगी, वहीं संवेदनशील माहौल को लेकर सुरक्षा का ध्यान भी रखा जा सकेगा।