इज़रायल और फिलिस्तीन के बीच जारी संघर्ष लगातार विकराल रूप ले रहा है। इज़रायल की ओर से गाजा पट्टी पर लगातार बमबारी की जा रही है, जिससे जनहानि और विनाश का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। इस युद्ध के बीच गाजा में भुखमरी का संकट भयावह रूप ले चुका है।
भारत से मदद की अपील, प्रधानमंत्री मोदी को लिखी चिट्ठी
इस गंभीर मानवीय संकट को देखते हुए फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने भारत से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर आग्रह किया है कि भारत, इज़रायल पर कूटनीतिक दबाव बनाए ताकि वह गाजा के लिए रोकी गई लगभग 2 अरब डॉलर की राशि को जारी करे। इस धनराशि से गाजा के भूखे, बीमार और ज़रूरतमंद नागरिकों को भोजन, दवाइयां और पीने का पानी मुहैया कराया जा सके।
भारत से उम्मीद: पुराने समर्थन की मिसालें
फिलिस्तीन ने यह भी उल्लेख किया कि भारत सदैव फिलिस्तीनी हितों का समर्थन करता रहा है—चाहे वह संयुक्त राष्ट्र हो या अन्य अंतरराष्ट्रीय मंच। इस बार भी उन्हें उम्मीद है कि भारत अपने ऐतिहासिक रुख पर कायम रहेगा और इज़रायल के साथ अपने अच्छे संबंधों का इस्तेमाल कर, फिलिस्तीन के लिए आवाज़ उठाएगा।
गाजा में भूख से तड़पते लोग, बच्चों की सबसे बड़ी कीमत
गाजा में हालात अत्यंत भयावह हैं। केवल एक दिन में चार बच्चों समेत 15 फिलिस्तीनी भूख से मारे गए, और अब तक कुपोषण व भूख के कारण मरने वालों की संख्या 101 हो चुकी है, जिनमें 80 बच्चे शामिल हैं। इज़रायली सेना की लगातार बमबारी के बीच संयुक्त राष्ट्र ने भी क्षेत्र की स्थिति को “अभूतपूर्व मानव त्रासदी” बताया है।
युद्ध का नया हथियार बनी भुखमरी
फिलिस्तीनी राजदूत शावेश ने एक साक्षात्कार में आरोप लगाया कि इज़रायल और अमेरिका ने भुखमरी को युद्ध का हथियार बना लिया है। खाने-पीने की वस्तुओं और ज़रूरी राहत सामग्री की आपूर्ति रोककर गाजा की स्थिति और भी अधिक विकराल बना दी गई है।
क्या भारत निभाएगा कूटनीतिक भूमिका?
अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो इज़रायल के साथ मज़बूत रिश्तों के लिए जाने जाते हैं, इस मानवीय संकट में मध्यस्थ या नैतिक आवाज़ की भूमिका निभाएंगे? क्या भारत एक बार फिर वैश्विक स्तर पर मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देगा?