हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष के दौरान अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पाकिस्तान की ओर झुकाव सभी के लिए चौंकाने वाला था। दुनिया भर में ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोस्ती की चर्चा रही है, ऐसे में पाकिस्तान को प्राथमिकता दिए जाने ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
बांग्लादेश और तुर्किये भी भारत के खिलाफ मुखर
इस बीच बांग्लादेश का भारत के प्रति आक्रामक रुख और अमेरिका द्वारा तुर्किये को AMRAAM मिसाइलें दिए जाने की तैयारी ने भी वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है। लेकिन इन देशों को ट्रंप का समर्थन महज रणनीतिक नहीं, बल्कि व्यापारिक कारणों से भी जुड़ा है।
ट्रंप परिवार का पाकिस्तान से क्रिप्टो कनेक्शन
हाल ही में ट्रंप परिवार के पाकिस्तान से गहरे व्यापारिक संबंध सामने आए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और उनके करीबी साथी जेंट्री बीच ने जनवरी में पाकिस्तान का दौरा किया था। वहां उन्हें प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित किया और दुर्लभ खनिज, तेल-गैस और रियल एस्टेट में अरबों डॉलर की संभावनाओं की जानकारी दी।
बांग्लादेश और तुर्किये की यात्रा भी रही रणनीतिक
पाकिस्तान से लौटने के बाद ट्रंप जूनियर और जेंट्री बीच ने बांग्लादेश और तुर्किये का भी दौरा किया। बांग्लादेश में उन्होंने प्रमुख सलाहकार मुहम्मद यूनुस से मुलाकात कर ऊर्जा, रक्षा और रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश की बात की। वहीं तुर्किये में टेरा होल्डिंग के साथ तेल और खनन में संयुक्त उद्यम की घोषणा की।
पुराने विवाद और व्यापारिक महत्वाकांक्षाएं
जेंट्री बीच पहले भी विवादों में रह चुके हैं। 2016 के अमेरिकी चुनावों में उन्होंने ट्रंप अभियान के लिए फंड जुटाया था और इसके बदले उन्हें उच्च प्रशासनिक पहुंच मिली। उन पर वेनेजुएला पर अमेरिकी प्रतिबंध हटाने की लॉबिंग करने के आरोप भी लगे थे। उनके पिता गैरी बीच को दिवालिया धोखाधड़ी में दोषी ठहराया जा चुका है।
पाकिस्तान में ‘50 ट्रिलियन डॉलर’ के खनिज और तुर्किये को ‘नई फैक्ट्री’ बनाने का प्रस्ताव
पाकिस्तान में जेंट्री बीच ने 50 ट्रिलियन डॉलर के दुर्लभ खनिज भंडार की बात की, जबकि तुर्किये को उन्होंने चीन की जगह अगली वैश्विक विनिर्माण शक्ति बनाने का वादा किया। इन बयानों ने अमेरिका के भू-राजनीतिक एजेंडे को व्यापारिक मुनाफे से जोड़ने की चिंताओं को हवा दी है।
क्रिप्टो परियोजना में ट्रंप परिवार की बड़ी हिस्सेदारी
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पाकिस्तान सरकार ने हाल ही में अमेरिकी कंपनी वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल के साथ अपनी क्रिप्टो परियोजना के लिए समझौता किया है, जिसमें ट्रंप परिवार की 60% हिस्सेदारी है। इस कंपनी में ट्रंप के दोनों बेटे — एरिक और डोनाल्ड जूनियर — भागीदार हैं। यह कंपनी पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल के साथ मिलकर काम कर रही है, जिसने बिनेंस के संस्थापक चांगपेंग झाओ को भी सलाहकार नियुक्त किया है।
व्यापारिक हितों पर भारी पड़ रही विदेश नीति?
इन घटनाक्रमों से स्पष्ट है कि ट्रंप और उनके परिवार का झुकाव उन देशों की ओर है जहाँ उन्हें भारी व्यापारिक संभावनाएं दिख रही हैं — भले ही वे देश भारत विरोधी रुख अपनाए हुए हों। यह मामला केवल विदेश नीति का नहीं, बल्कि निजी फायदे और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच टकराव का भी है।