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“जो डर गया वो मर गया”: ममता बनर्जी का मोदी सरकार पर सीधा वार

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची में संशोधन के जरिए लोगों के मतदान अधिकार छीने जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कई लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जिसके खिलाफ वे Calcutta High Court से लेकर Supreme Court of India तक गईं। उन्होंने भरोसा जताया कि लोगों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी।

“हम डरेंगे नहीं, लड़ाई जारी रहेगी”

Mamata Banerjee ने कहा कि वे बंगाल के हर वर्ग—जाति, समुदाय और धर्म—के साथ खड़ी हैं और इस लड़ाई को जारी रखेंगी।

उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार को जबरन नियंत्रित करने और राष्ट्रपति शासन लागू करने की कोशिश की जा रही है। उनके शब्दों में,
“हम मोदी जी को अपने अधिकार छीनने नहीं देंगे… जो डरते हैं, वो मरते हैं, जो लड़ते हैं, वही सफल होते हैं।”

ईद की नमाज के बाद बड़ा संबोधन

कोलकाता के रेड रोड पर ईद की नमाज के बाद हजारों लोगों को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष संशोधन को चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की साजिश बताया।

उन्होंने कहा कि यह कदम खास तौर पर वैध मतदाताओं, विशेषकर अल्पसंख्यक क्षेत्रों के लोगों को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश हो सकता है।

लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी लोकतंत्र की रक्षा के लिए अंत तक संघर्ष करेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि मतदाता सूची के नाम पर किसी भी नागरिक को वोट देने के अधिकार से वंचित करने की कोशिश का कड़ा विरोध किया जाएगा।

सभा में उन्होंने यह भी कहा कि जो ताकतें बंगाल को बांटने की कोशिश कर रही हैं, उन्हें जनता जवाब देगी। उनके इस बयान पर वहां मौजूद लोगों ने जोरदार तालियां बजाईं।

सांप्रदायिक सौहार्द पर जोर

Mamata Banerjee ने बंगाल की एकता और भाईचारे की परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में सभी धर्मों के लोग मिलकर रहते हैं।

उन्होंने कहा, “हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई—सभी यहां साथ हैं और हम किसी को भी इस सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने नहीं देंगे।”

चुनावी माहौल में बढ़ी सियासत

रेड रोड पर आयोजित यह बड़ा ईद जमावड़ा पूर्वी भारत के प्रमुख आयोजनों में से एक माना जाता है। चुनावी साल में यह मंच राजनीतिक संदेश देने के लिए भी अहम बन जाता है, जहां पार्टियां बड़ी संख्या में मतदाताओं तक पहुंचती हैं।

इस बीच, मतदाता सूची को लेकर उठे विवाद ने पश्चिम बंगाल की सियासत को और गरमा दिया है।

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