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West Bengal: बागी TMC सांसदों पर कार्रवाई की मांग, सौगत रॉय का बड़ा बयान

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी हलचल के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है। उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर संबंधित सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की।

स्पीकर से मिलकर उठाई कार्रवाई की मांग

सौगत रॉय ने बताया कि वह चार अन्य सांसदों के साथ लोकसभा स्पीकर से मिले। करीब एक घंटे तक चली बैठक में टीएमसी नेताओं ने बागी सांसदों के कदम को संसदीय नियमों और दलगत व्यवस्था के खिलाफ बताया।

उन्होंने कहा कि जो सांसद स्वेच्छा से पार्टी छोड़ते हैं, उनके मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

‘मर्जर के नियमों का पालन नहीं किया गया’

टीएमसी सांसद ने दलील दी कि बागी सांसदों ने किसी दूसरी पार्टी के साथ विलय (मर्जर) से जुड़े कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया है। ऐसे में उनके नए समूह को आधिकारिक मान्यता नहीं मिलनी चाहिए।

उन्होंने उम्मीद जताई कि लोकसभा स्पीकर संविधान और नियमों के अनुरूप निर्णय लेंगे।

बजट सत्र से पहले सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल

पश्चिम बंगाल के बजट सत्र से पहले सौगत रॉय ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि वह देखना चाहते हैं कि सरकार बढ़ते कर्ज, आर्थिक दबाव और बेरोजगारी जैसी चुनौतियों से कैसे निपटती है।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

राजनीतिक विवाद तब बढ़ा जब टीएमसी के कुछ सांसदों ने पार्टी से अलग रुख अपनाते हुए संसद में एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया।

बताया गया कि इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर से अलग बैठने की व्यवस्था की भी मांग की और दावा किया कि उनके पास पर्याप्त संख्या बल मौजूद है।

टीएमसी ने बताया मतदाताओं के साथ विश्वासघात

टीएमसी नेतृत्व ने इस घटनाक्रम पर कड़ी नाराजगी जताई है।

पार्टी नेता कुणाल घोष ने कहा कि संबंधित सांसद पार्टी के चुनाव चिन्ह और नेतृत्व के आधार पर जीतकर आए थे। ऐसे में राजनीतिक रुख बदलना मतदाताओं के विश्वास के खिलाफ माना जा सकता है।

वहीं, मदन मित्रा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर राजनीतिक असहमति पार्टी के भीतर गंभीर संकेत देती है।

भाजपा ने बताया टीएमसी का अंदरूनी मामला

दूसरी ओर भाजपा ने पूरे घटनाक्रम को टीएमसी का आंतरिक संकट बताया है।

भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष को आरोप लगाने के बजाय अपनी राजनीतिक स्थिति का आकलन करना चाहिए।

अब सभी की नजरें लोकसभा स्पीकर के अगले फैसले पर टिकी हैं कि इस मामले में क्या रुख अपनाया जाता है।

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