इस साल मौसम की चरम परिस्थितियों ने देशभर में भारी तबाही मचाई है। बीमारियों और हादसों के अलावा अब मौसम भी बड़ी संख्या में लोगों की जान ले रहा है। इस साल के पहले नौ महीनों में, रिकॉर्ड तोड़ सर्दी, गर्मी, बारिश और बाढ़ ने जीवन को प्रभावित किया।
दिल्ली स्थित थिंक टैंक, **सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE)** की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल के पहले नौ महीनों में **3,238 लोगों** की मौत हुई और **2.3 लाख से अधिक मकान नष्ट** हो गए। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत में **93 प्रतिशत दिन** यानी कुल 274 दिनों में से 255 दिन मौसम की चरम परिस्थितियों से जुड़ी घटनाओं का सामना करना पड़ा।
रिपोर्ट के अनुसार, इन घटनाओं ने **32 लाख हेक्टेयर फसलों** को प्रभावित किया और **9,457 पशु** मारे गए। अगर पिछले साल के आंकड़ों से तुलना की जाए, तो 2023 में **2,923 मौतें** और **80,293 मकान** क्षतिग्रस्त हुए थे। लेकिन इस साल नुकसान का आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है, क्योंकि डेटा विश्लेषण में कुछ घटनाओं का डेटा शामिल नहीं किया गया है।
– **केरल** में सबसे अधिक **550 मौतें** हुईं।
– **मध्य प्रदेश** में **176 दिन** तक मौसम की चरम परिस्थितियां बनीं।
– **आंध्र प्रदेश** में सबसे अधिक **85,806 मकान** क्षतिग्रस्त हुए।
– **महाराष्ट्र** में **60 प्रतिशत से अधिक फसलें नष्ट** हुईं।
इस साल जलवायु संबंधित कई नए रिकॉर्ड भी बने हैं। जनवरी में **1901 के बाद का नौवां सबसे सूखा महीना** रहा, और फरवरी में **123 सालों का दूसरा सबसे कम न्यूनतम तापमान** दर्ज किया गया।
**सुनीता नारायण**, CSE की महानिदेशक ने कहा कि इन रिकॉर्डों से **जलवायु परिवर्तन** के प्रभाव स्पष्ट रूप से दिख रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले ये घटनाएं **एक शताब्दी में एक बार** होती थीं, लेकिन अब यह घटनाएं हर पांच साल में हो रही हैं।
– बाढ़ से **1,376 मौतें** हुईं।
– **वज्रपात और तूफान** ने **1,021 लोगों** की जान ली।
इस रिपोर्ट के मुताबिक, मौसम की चरम घटनाओं के कारण देश में व्यापक तबाही हुई है, और आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी घटनाओं के बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।