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“वोट बैंक की राजनीति में घुसपैठियों की भरमार, लोकतंत्र बचाने को ज़रूरी है विशेष पुनरीक्षण”

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भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रणाली है। इस प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है– मतदाता सूची। लेकिन जब इसमें गड़बड़ियाँ होती हैं या विदेशी नागरिकों को अवैध रूप से शामिल किया जाता है, तो यह पूरी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

बिहार में घुसपैठियों का बढ़ता असर

बिहार के सीमावर्ती जिलों– किशनगंज, कटिहार, अररिया और पूर्णिया में लंबे समय से बांग्लादेशी मुसलमानों की अवैध घुसपैठ की खबरें आती रही हैं। ये लोग स्थानीय पहचान पत्र (आधार, राशन कार्ड आदि) बनवाकर धीरे-धीरे मतदाता सूची में शामिल हो जाते हैं। कुछ राजनीतिक दल इन्हें वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करते हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक संतुलन और लोकतंत्र– तीनों पर खतरा बढ़ता जा रहा है।

वोट का अधिकार या वोट का दुरुपयोग?

जब अवैध नागरिक मतदाता सूची में शामिल होते हैं और चुनाव में हिस्सा लेते हैं, तो इससे न सिर्फ चुनाव परिणामों में गड़बड़ी आती है, बल्कि वे सरकारी योजनाओं का अनुचित लाभ भी उठाते हैं। इससे वास्तविक लाभार्थी वंचित रह जाते हैं और धर्म व जाति आधारित राजनीति को बढ़ावा मिलता है, जो सामाजिक सौहार्द के लिए घातक है।

क्यों जरूरी है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन?

भारत का चुनाव आयोग समय-समय पर मतदाता सूची का सामान्य संशोधन करता है। लेकिन बिहार जैसे संवेदनशील राज्य में, जहां घुसपैठ का खतरा अधिक है, वहाँ विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) की आवश्यकता है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अनुसार, यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करेगी कि केवल पात्र नागरिक ही मतदाता सूची में शामिल हों। बिहार के अलावा चुनाव आयोग छह और राज्यों में इस प्रक्रिया को लागू करने की योजना बना रहा है।

विपक्षी दलों की आपत्ति और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

इस विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया पर 10 विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई है और इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इनका तर्क है कि इससे कई लोगों का मताधिकार छिन सकता है। सुप्रीम कोर्ट में इस पर 10 जुलाई को सुनवाई होनी है। अब देखना होगा कि न्यायपालिका का रुख क्या रहता है।

मतदाता सूची की शुद्धता: लोकतंत्र की रक्षा का पहला कदम

बिहार में आबादी का घनत्व, आर्थिक असमानता और सीमा से सटे जिले– ये सभी कारक अवैध प्रवासियों के लिए अनुकूल माहौल बनाते हैं। ऐसे में मतदाता सूची की पवित्रता बनाए रखना लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवश्यक है। यदि समय रहते बांग्लादेशी घुसपैठियों को मतदाता बनने से नहीं रोका गया, तो यह न केवल चुनावों को भ्रष्ट करेगा, बल्कि आंतरिक सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है।

लोकतंत्र के लिए साझा ज़िम्मेदारी

अब समय आ गया है कि चुनाव आयोग, सरकार और जनता तीनों मिलकर मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करें। बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन लोकतंत्र की नींव को मज़बूत करने का एक अनिवार्य सुधार बन चुका है। यह केवल एक चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा की रक्षा है।

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