विवाह पंचमी भगवान श्रीराम और माता सीता के पावन विवाह दिवस की वर्षगांठ है, जिसे भारत और नेपाल के जनकपुर में विशेष भक्ति भाव से मनाया जाता है। यह त्योहार आदर्श दांपत्य, प्रेम, निष्ठा और एकता का प्रतीक है। मान्यता है कि इसी दिन तुलसीदास ने रामचरितमानस का लेखन भी पूरा किया था।
विवाह पंचमी 2025 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार विवाह पंचमी मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है।
तिथि प्रारंभ: 24 नवंबर 2025 रात 9:22 बजे
तिथि समाप्त: 25 नवंबर 2025 रात 10:56 बजे
उदया तिथि को मानते हुए, विवाह पंचमी 25 नवंबर 2025 (मंगलवार) को मनाई जाएगी।
शुभ मुहूर्त
पूजा के लिए पंचमी तिथि के दौरान सुबह और शाम का समय सबसे शुभ माना गया है।
विवाह पंचमी का धार्मिक महत्व
भगवान राम और सीता माता की पूजा करने से विवाह में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं।
योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के योग बढ़ते हैं।
दांपत्य जीवन में सुख, शांति और संतुलन बना रहता है।
इस दिन शादी करना शुभ नहीं माना जाता, क्योंकि मान्यता है कि विवाह के बाद माता सीता को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था।
विवाह पंचमी पूजा विधि
तैयारी
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान राम का ध्यान करें।
पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें।
श्रीराम और सीता माता की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
पूजन विधि
भगवान श्रीराम को पीले और माता सीता को लाल वस्त्र अर्पित करें।
दीपक जलाएं, तिलक करें और फल-फूल, प्रसाद चढ़ाएं।
रामचरितमानस के बालकांड में वर्णित विवाह प्रसंग का पाठ करें।
पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, जल) से भगवान की प्रतिमाओं का अभिषेक करें।
मूर्तियों को नए वस्त्र पहनाकर फल, फूल और मिठाई चढ़ाएं।
अंत में आरती और भजन करें।
विवाह पंचमी पर विवाह क्यों नहीं होते?
मान्यता है कि माता सीता ने विवाह के बाद कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया था। इसलिए इस दिन शादी जैसे मंगल कार्य न करने की परंपरा है। माता-पिता इस दिन अपनी बेटियों का विवाह न करने में ही शुभ मानते हैं।
विवाह पंचमी कैसे मनाएं?
मंदिर जाकर विशेष पूजा-अर्चना करें।
सीता-राम विवाह की झांकी या रीएक्टमेंट देखें या भाग लें।
ज़रूरतमंदों को भोजन, कपड़े या अन्य सामग्री दान करें।
स्थानीय जुलूस और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल हों।
विवाह पंचमी के विशेष उपाय
विवाह में बाधा दूर करने के लिए
“ॐ श्री सीता रामाय नमः” का 108 बार जाप करें।
शीघ्र विवाह के लिए
तुलसी माता के सामने दीपक जलाएं और गुड़ चढ़ाएं।
दांपत्य जीवन में सुख-सौहार्द के लिए
पति-पत्नी साथ में मिलकर भोजन या वस्त्र दान करें।
घर में शांति के लिए
घर या निकट के मंदिर में सीता-राम विवाह पूजा करवाएं।