वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विकट संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से व्यक्ति को हर प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है।
विकट संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना गया है। हर महीने आने वाली संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व होता है, लेकिन वैशाख मास की चतुर्थी को “विकट” संकष्टी कहा जाता है।
“विकट” का अर्थ है कठिन या जटिल परिस्थिति
इस दिन व्रत और पूजा से जीवन की बड़ी बाधाएं दूर होती हैं
नारद पुराण के अनुसार, यह व्रत चंद्रमा और बुध से जुड़े दोषों को शांत करता है
मानसिक तनाव, आर्थिक संकट और पारिवारिक समस्याएं कम होती हैं
मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर बुद्धि, ज्ञान, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
2026 में विकट संकष्टी चतुर्थी कब है?
तिथि: 5 अप्रैल 2026 (रविवार)
चतुर्थी प्रारंभ: सुबह 11:59 बजे
चतुर्थी समाप्त: 6 अप्रैल दोपहर 2:10 बजे
व्रत: 5 अप्रैल को रखा जाएगा
पारण: चंद्रोदय के बाद
शुभ मुहूर्त:
ब्रह्म मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त
अमृत काल
व्रत की तैयारी और नियम
व्रत की तैयारी एक दिन पहले से कर लेनी चाहिए।
आवश्यक सामग्री:
गणेश जी की प्रतिमा या चित्र
लाल कपड़ा
गंगाजल, पंचामृत
दूर्वा घास (21 गांठ)
लाल फूल
मोदक या लड्डू
सिंदूर, अक्षत
घी का दीपक, अगरबत्ती
फल और मिठाई
व्रत के नियम:
पूर्ण उपवास या फलाहार रखें
लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन से परहेज
तुलसी के पत्ते गणेश जी को न चढ़ाएं
सुबह स्नान के बाद संकल्प लें
दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है
विकट संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें (लाल/पीला)
चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी की स्थापना करें
जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें
गंगाजल या पंचामृत से स्नान कराएं
सिंदूर, अक्षत, दूर्वा और फूल अर्पित करें
दीपक और अगरबत्ती जलाएंमोदक/लड्डू का भोग लगाएं
“ॐ गं गणपतये नमः
” मंत्र का जाप करें
व्रत कथा सुनें और आरती करें
पारण विधि:
रात में चंद्रमा को अर्घ्य दें
अर्घ्य देते समय सीधे चंद्रमा को न देखें
अर्घ्य के बाद व्रत खोलें
विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
एक समय धर्मकेतु नामक ब्राह्मण की दो पत्नियां थीं—सुशीला और चंचला। सुशीला धार्मिक और व्रत रखने वाली थी, जबकि चंचला ऐसा नहीं करती थी।
सुशीला को पुत्री और चंचला को पुत्र हुआ
चंचला ने सुशीला का उपहास किया
विकट संकष्टी चतुर्थी पर सुशीला ने सच्चे मन से व्रत किया
भगवान गणेश प्रसन्न हुए और उसे पुत्र का वरदान मिला
आगे चलकर सुशीला का पुत्र सफल और समृद्ध हुआ, जबकि चंचला का पुत्र आलसी निकला। ईर्ष्या में चंचला ने सुशीला की पुत्री को कुएं में धकेल दिया, लेकिन गणेश जी ने उसकी रक्षा की।
यह देखकर चंचला को पश्चाताप हुआ। उसने भी व्रत किया और गणेश जी की कृपा से उसका जीवन भी सुधर गया।
विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत श्रद्धा और नियम से करने पर जीवन के बड़े से बड़े संकट दूर होते हैं। भगवान गणेश की कृपा से सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।