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“झारखंड में लोकतंत्र की जीत, नक्सलियों की घमकी के बावजूद मतदान केंद्रों पर लंबी कतार”

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झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के सोनापी प्राथमिक विद्यालय में मतदाताओं ने नक्सलियों की धमकी को नकारते हुए बड़ी संख्या में मतदान किया। नक्सलियों ने मतदान को रोकने के लिए पोस्टर लगाकर रास्ता बाधित करने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षा बलों ने इन पोस्टरों और रुकावटों को सफलतापूर्वक हटा दिया। सुबह 11 बजे तक, सोनापी के मतदान केंद्र संख्या 25 पर 60% मतदान दर्ज किया गया।

पहले चरण के चुनाव में एक और सकारात्मक खबर आई। झारखंड के बरगद गढ़वा क्षेत्र के यूएमएस हेसातु में लंबी कतारें और शांतिपूर्ण मतदान के दृश्य देखे गए। यह क्षेत्र कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था, लेकिन अब यहां लोकतंत्र के एक नए युग की शुरुआत हो रही है। इस मतदान केंद्र में लोगों ने पहली बार अपने गांव में मतदान किया।

झारखंड विधानसभा की 43 सीटों के लिए बुधवार को मतदान शुरू हो गया। इस चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन सहित कुल 683 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। मतदान प्रक्रिया सुबह सात बजे शुरू हुई और शाम पांच बजे तक जारी रहेगी। हालांकि, 950 मतदान केंद्रों पर मतदान शाम चार बजे समाप्त हो जाएगा, लेकिन उस समय तक कतार में खड़े लोग अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे।

झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाला गठबंधन सत्ता बरकरार रखने की कोशिश कर रहा है, जिसमें उन्होंने अपनी कल्याणकारी योजनाओं जैसे ‘मैय्या सम्मान योजना’ को प्रमुख मुद्दा बनाया है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) घुसपैठ और मौजूदा सरकार के कथित भ्रष्टाचार को मुद्दा बना कर चुनावी प्रचार कर रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राज्य में कई रैलियों को संबोधित किया, जबकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार किया। इस चुनाव में कुल 1.37 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे।

झारखंड में लोकतंत्र की ताकत का प्रमाण इस बार के विधानसभा चुनाव में देखने को मिला, जहां नक्सलियों की धमकी को दरकिनार कर मतदाताओं ने उत्साह के साथ मतदान किया। यह चुनाव राज्य की राजनीतिक दिशा को तय करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

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