अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले को लेकर राजनीतिक और धार्मिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। जहां एक ओर जांच एजेंसियां मामले की पड़ताल में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर नेताओं और धार्मिक संगठनों के बीच बयानबाजी का दौर भी तेज हो गया है। इसी क्रम में पूर्व मंत्री और समाजवादी पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य के एक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।
भगवान श्रीराम पर टिप्पणी से बढ़ा विवाद
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि जब भगवान राम अपने मंदिर और चढ़ावे की रक्षा नहीं कर सके, तो वे दूसरों की रक्षा कैसे करेंगे। उन्होंने दावा किया कि मंदिर और गर्भगृह में चोरी हुई, सोना-चांदी तक गायब हो गया, लेकिन भगवान राम चोरों को सजा नहीं दे सके।
मौर्य के इस बयान के बाद संत समाज और विभिन्न धार्मिक संगठनों में नाराजगी फैल गई है।
महंत राजू दास ने जताई कड़ी आपत्ति
अयोध्या के प्रसिद्ध श्रीहनुमानगढ़ी मंदिर के महंत राजू दास ने स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर और सनातन धर्म को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।
राजू दास ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि निष्पक्ष जांच के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी, इसलिए लोगों को धैर्य रखना चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि मामले में शामिल सभी लोगों पर कार्रवाई होगी।
अब तक आठ गिरफ्तारियां
महंत राजू दास ने बताया कि इस मामले में अब तक आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जांच आगे बढ़ने के साथ अन्य दोषियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही उन्होंने लोगों से इस मामले का राजनीतिकरण न करने की अपील की।
मौर्य पर साधा निशाना
महंत राजू दास ने स्वामी प्रसाद मौर्य पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि उनमें साहस है तो वे अन्य धर्मों पर भी ऐसी टिप्पणी करके दिखाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौर्य केवल सनातन धर्म और हिंदुत्व को ही निशाना बनाते हैं।
राजू दास ने कहा कि इस प्रकार के बयान धार्मिक भावनाओं को आहत करते हैं और सरकार को इस मामले में उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
पहले भी विवादों में रहे हैं स्वामी प्रसाद मौर्य
यह पहला अवसर नहीं है जब स्वामी प्रसाद मौर्य अपने बयानों को लेकर विवादों में आए हों। इससे पहले भी वे सनातन धर्म, हिंदू आस्था और रामचरितमानस को लेकर दिए गए बयानों के कारण चर्चा में रह चुके हैं।
उन्होंने अतीत में हिंदू धर्म को लेकर विवादित टिप्पणियां की थीं और रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों पर भी आपत्ति जताई थी। इसके अलावा उन्होंने हिंदू देवी-देवताओं के स्वरूप पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद कई स्थानों पर उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन और मुकदमे दर्ज हुए थे।
चढ़ावा चोरी मामले में क्या है आरोप?
राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले में अब तक मंदिर प्रबंधन से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच के दौरान आरोपियों के घरों से करीब 80 लाख रुपये नकद बरामद किए जाने की बात सामने आई है।
इस बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और वरिष्ठ ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा ने शुक्रवार को अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, उनके इस्तीफे के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब समाजवादी पार्टी के नेता तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में चढ़ावे के रूप में आए 5 से 7.5 करोड़ रुपये तक की राशि का गबन हुआ है।
उन्होंने दावा किया था कि मंदिर में प्राप्त दान और चढ़ावे के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। इसके बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया।
एसआईटी कर रही है जांच
आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। बताया गया कि यह कदम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उठाया गया था ताकि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।
जांच एजेंसियां आरोपियों से पूछताछ कर रही हैं और वित्तीय लेनदेन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच जारी है।
राजनीतिक और धार्मिक बहस का केंद्र बना मामला
राम मंदिर से जुड़ा यह विवाद अब केवल कथित आर्थिक अनियमितताओं तक सीमित नहीं रह गया है। यह राजनीतिक और धार्मिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका है।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस मामले में नए खुलासों और घटनाक्रमों की संभावना भी बढ़ती जा रही है।