उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि आधार कार्ड को अब जन्म प्रमाणपत्र या जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश के योजना विभाग ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि आधार कार्ड को जन्म प्रमाणपत्र मानने की प्रक्रिया तुरंत बंद की जाए। योजना विभाग के विशेष सचिव अमित सिंह बंसल ने सभी विभागों को यह आदेश भेजा। आदेश के बाद, आधार कार्ड को जन्म प्रमाणपत्र के रूप में स्वीकार करना अवैध हो गया है।
महाराष्ट्र में भी नए दिशा-निर्देश
महाराष्ट्र सरकार ने भी आदेश जारी किया है कि आधार के आधार पर विलंबित जन्म प्रमाणपत्र (Delayed Birth Certificate) जारी नहीं किए जाएंगे।
राज्य के राजस्व विभाग के अनुसार, जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम 2023 लागू होने के बाद, आधार आधारित सभी जन्म प्रमाणपत्र रद्द कर दिए जाएंगे। साथ ही, ऐसे प्रमाणपत्र जारी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्व विभाग की 16-बिंदु सत्यापन गाइडलाइन के अनुसार, 11 अगस्त 2023 के संशोधन के बाद डिप्टी तहसीलदारों द्वारा जारी आदेशों को वापस लेकर जिला कलेक्टर या सक्षम प्राधिकारी द्वारा पुनः सत्यापित किया जाएगा।
SIR प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट का संदर्भ
यह निर्णय ऐसे समय आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने बिहार की मतदाता सूची के संदर्भ में आधार को पहचान पत्र के रूप में स्वीकार किया है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि SIR प्रक्रिया के दौरान आधार को अन्य अनुमत दस्तावेजों के साथ पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाए।
इस बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सभी जिलों को अस्थायी निरुद्ध केंद्र बनाने और प्रवासियों की पहचान कर उचित कार्रवाई करने को कहा गया है।
नेपाल के नागरिकों के लिए उत्तर प्रदेश में खुली सीमा है, जबकि अन्य देशों के नागरिकों के लिए सत्यापन आवश्यक है। यह कदम 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही मतदाता सूची संशोधन (SIR) प्रक्रिया के बीच आया है, जिसकी अंतिम सूची 7 फरवरी 2026 को जारी होगी।
प्रशासनिक सुधार और नागरिकों के लिए प्रभाव
आधार केवल पहचान का साधन है, जन्म का प्रमाण नहीं।
जन्म प्रमाणपत्र एक कानूनी दस्तावेज है, जिसे अभिलेखीय सत्यापन के आधार पर जारी किया जाता है।
यह निर्णय प्रशासनिक स्पष्टता की दिशा में महत्वपूर्ण है।
हालांकि, इस निर्णय से लाखों नागरिकों को दस्तावेज़ी कठिनाइयाँ हो सकती हैं, विशेषकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए। इसलिए सरकारों को विकल्पों की जानकारी, प्रमाणपत्र बनवाने की सरल प्रक्रिया और समयबद्ध सहायता सुनिश्चित करनी होगी।
आधार को जन्म प्रमाणपत्र के रूप में अस्वीकार करना प्रशासनिक दृष्टि से सही और आवश्यक कदम है।
लेकिन इसके क्रियान्वयन में नागरिकों की सुविधा और अधिकारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, तभी यह कदम वास्तव में सार्थक माना जाएगा।