प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में आज दो ऐसे अहम फैसले लिए गए, जिनका असर देश के करोड़ों श्रमिकों और छोटे उद्यमियों पर सीधे तौर पर पड़ेगा। एक ओर अटल पेंशन योजना को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है, तो दूसरी ओर एमएसएमई क्षेत्र को सस्ती पूंजी उपलब्ध कराने का रास्ता साफ किया गया है।
अटल पेंशन योजना को 2030-31 तक बढ़ाया गया
कैबिनेट ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए चलाई जा रही अटल पेंशन योजना को वर्ष 2030-31 तक जारी रखने का फैसला किया है। इसके तहत योजना के प्रचार-प्रसार, क्षमता निर्माण और विकासात्मक गतिविधियों के लिए सरकारी सहयोग जारी रहेगा। साथ ही, योजना को टिकाऊ बनाए रखने के लिए गैप फंडिंग की व्यवस्था भी बनी रहेगी।
वर्ष 2015 में शुरू की गई यह योजना 60 वर्ष की आयु के बाद 1000 से 5000 रुपये तक की मासिक पेंशन की गारंटी देती है। जनवरी 2026 तक इस योजना से 8 करोड़ 66 लाख से अधिक लोग जुड़ चुके हैं। सरकार का मानना है कि योजना को आगे बढ़ाने से असंगठित क्षेत्र के और अधिक श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा।
असंगठित श्रमिकों को बुढ़ापे की सुरक्षा का भरोसा
अटल पेंशन योजना का विस्तार यह स्वीकार करता है कि भारत की बड़ी आबादी आज भी असंगठित क्षेत्र में काम करती है। रिक्शा चालक, घरेलू कामगार, रेहड़ी-पटरी वाले, खेत मजदूर और छोटे कारीगरों के लिए बुढ़ापा अक्सर असुरक्षा से जुड़ा रहा है। सरकार का यह फैसला उन्हें यह भरोसा देता है कि कामकाजी जीवन के बाद भी सम्मानजनक जीवन संभव है।
सरकार का जोर केवल पेंशन देने तक सीमित नहीं है, बल्कि वित्तीय जागरूकता बढ़ाने पर भी है ताकि अंतिम पंक्ति में खड़ा व्यक्ति भी सामाजिक सुरक्षा की अहमियत समझ सके।
एमएसएमई को सस्ती पूंजी के लिए सिडबी को 5000 करोड़
दूसरे बड़े फैसले के तहत स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI) को 5000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता देने को मंजूरी दी गई है। यह पूंजी तीन चरणों में दी जाएगी, जिससे बैंक की पूंजीगत स्थिति मजबूत होगी और वह एमएसएमई क्षेत्र को अधिक ऋण उपलब्ध करा सकेगा।
सरकार के अनुसार, इस निवेश से वर्ष 2028 तक लगभग 25 लाख 74 हजार नए एमएसएमई लाभार्थी जुड़ सकते हैं और करीब 1 करोड़ 12 लाख नए रोजगार सृजित होने की संभावना है।
रोजगार और उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा
सिडबी की मजबूत पूंजी स्थिति से छोटे उद्यमियों को सस्ती दरों पर ऋण मिल सकेगा। इससे स्टार्टअप, कुटीर उद्योग और पारंपरिक व्यवसायों को विस्तार का अवसर मिलेगा। समय पर और किफायती पूंजी मिलने से उत्पादन बढ़ेगा, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण व अर्ध-शहरी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
वर्तमान और भविष्य को साधने की नीति
इन दोनों फैसलों को एक साथ देखें तो साफ होता है कि सरकार की नीति दो मोर्चों पर काम कर रही है—एक ओर बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा और दूसरी ओर रोजगार व उद्यमिता का विस्तार। यह न केवल आज की जरूरतों को पूरा करने की कोशिश है, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए भी एक मजबूत सामाजिक और आर्थिक ढांचा तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम है।