नई दिल्ली,(नेशनल थॉट्स ) : सनातन धर्म में, तुलसी के पौधे को अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना जाता है, इसलिए इन्हें तुलसी मां या तुलसी महारानी कहने का आदर किया जाता है। कार्तिक मास में प्रबोधिनी एकादशी आती है, जिसे देवउठनी एकादशी भी कहा जाता है। इसके अगले दिन, यानी द्वादशी तिथि पर, तुलसी विवाह का आयोजन होता है। कुछ साधक देवउठनी एकादशी पर भी तुलसी विवाह का आयोजन करते हैं।
तुलसी विवाह का मुहूर्त (Tulsi Vivah Muhurat)
कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि 23 नवंबर रात 09 बजकर 01 मिनट से शुरू हो रही है। वहीं, इसका समापन 24 नवंबर, शाम 07 बजकर 06 मिनट पर होगा। ऐसे में तुलसी विवाह 24 नवंबर को किया जाएगा। इस दौरान प्रदोष काल शाम 05 बजकर 25 मिनट से 06 बजकर 04 मिनट तक रहेगा।जरूर बना लें ये सामग्री (Tulsi Vivah Samagri List)
तुलसी का पौधा, शालिग्राम, विष्णु जी की प्रतिमा
लकड़ी की चौकी
गन्ना, मूली, आंवला, शकरकंद, बेर, सिंघाड़ा, सीताफल
धूप-दीप, फूल, हल्दी की गांठ
लाल चुनरी, चूड़ियां और श्रृंगार की सामग्री
बताशा, मिठाई
अक्षत,रोली, कुमकुम
कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि 23 नवंबर रात 09 बजकर 01 मिनट से शुरू हो रही है। वहीं, इसका समापन 24 नवंबर, शाम 07 बजकर 06 मिनट पर होगा। ऐसे में तुलसी विवाह 24 नवंबर को किया जाएगा। इस दौरान प्रदोष काल शाम 05 बजकर 25 मिनट से 06 बजकर 04 मिनट तक रहेगा।जरूर बना लें ये सामग्री (Tulsi Vivah Samagri List)
तुलसी का पौधा, शालिग्राम, विष्णु जी की प्रतिमा
लकड़ी की चौकी
गन्ना, मूली, आंवला, शकरकंद, बेर, सिंघाड़ा, सीताफल
धूप-दीप, फूल, हल्दी की गांठ
लाल चुनरी, चूड़ियां और श्रृंगार की सामग्री
बताशा, मिठाई
अक्षत,रोली, कुमकुम
तुलसी विवाह पूजा विधि (Tulsi Vivah Pujan Vidhi)
तुलसी विवाह के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर लें। पूजा स्थल की अच्छे से साफ-सफाई के बाद गंगाजल का छिड़काव करें। इसके बाद वहां दो लकड़ी की चौकी रखें और उसपर लाल रंग का आसन बिछाएं। एक कलश में गंगाजल भरकर उसमें आम के 5 या 7 पत्ते डालें। तुलसी के गमले को गेरू से रंगने के बाद एक आसन पर स्थापित करें और दूसरे आसन पर शालिग्राम जी को स्थापित कर दें।अब दोनों चौकियों के ऊपर गन्ने से मंडप तैयार कर लें। इसके बाद शालिग्राम और तुलसी जी के सामने घी का दीपक जलाएं। इसके बाद तुलसी जी को रोली-कुमकुम से तिलक लगाएं और उसका श्रृंगार करें। शृंगार के दौरान तुलसी महारानी को लाल चुनरी भी पहनाएं। इसके बाद शालिग्राम जी को चौकी के साथ, हाथ में लेकर तुलसी जी की 7 बार परिक्रमा करें और अपने परिवार की खुशहाली के लिए कामना करें।