प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिलहाल फ्रांस में एआई समिट में हिस्सा ले रहे हैं और जल्द ही अमेरिका पहुंचने वाले हैं। लेकिन उनके वाशिंगटन पहुंचने से पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐतिहासिक आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए, जिससे भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी को राहत मिल सकती है। ट्रंप ने 50 साल पुराने फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेस एक्ट (एफसीपीए) को निलंबित कर दिया है। यह वही कानून है जिसके तहत अडानी पर अंतरराष्ट्रीय रिश्वतखोरी का मामला चल रहा है।
ट्रंप ने इस कानून को व्यापार के लिए बाधा बताते हुए कहा कि यह अमेरिकी कंपनियों को वैश्विक स्तर पर नुकसान पहुंचा रहा था। उन्होंने अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी को आदेश दिया कि एफसीपीए के तहत चल रहे सभी मामलों को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
क्या है एफसीपीए?
1977 में लागू हुआ फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेस एक्ट अमेरिकी कंपनियों और नागरिकों को विदेशी सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने से रोकता है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार में नैतिकता और पारदर्शिता को बढ़ावा देना है। हालांकि, ट्रंप ने इसे “व्यावहारिक रूप से व्यापार के लिए विनाशकारी” बताया।
अडानी ग्रुप को क्यों मिलेगी राहत?
गौतम अडानी और उनके सहयोगियों पर आरोप था कि उन्होंने विदेशी व्यापारिक सौदों में रिश्वतखोरी की, जिससे एफसीपीए के तहत मामले दर्ज किए गए। अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (एसईसी) और न्याय विभाग (डीओजे) ने आरोप लगाया था कि अडानी ग्रुप ने 2021 में 250 मिलियन डॉलर की रिश्वत योजना के जरिए 750 मिलियन डॉलर जुटाए।
ट्रंप के आदेश का असर
ट्रंप के इस आदेश के बाद एफसीपीए के तहत अडानी ग्रुप पर चल रहे मामले को रोकने की संभावना है। यह न केवल अडानी बल्कि उन सभी अमेरिकी कंपनियों और विदेशी व्यवसायों के लिए राहत लेकर आया है, जो इस कानून के कारण मुश्किल में थे।
मोदी और ट्रंप की व्यापारिक कूटनीति
मोदी के अमेरिका दौरे और ट्रंप के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि इस फैसले का वैश्विक व्यापार पर क्या प्रभाव पड़ता है।