जयराम रमेश ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पाकिस्तान–अफगानिस्तान तनाव को लेकर हालिया रुख ने “स्वघोषित विश्वगुरु” की छवि को कमजोर किया है।
रमेश ने ट्रंप द्वारा पाकिस्तान के प्रति जताए गए “स्पष्ट और खुले समर्थन” को भारतीय ‘हग्लोमेसी’ (Hugplomacy) के लिए बड़ा झटका बताया।
पहलगाम हमले का संदर्भ
एक सोशल मीडिया पोस्ट में जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि ट्रंप ने उस नेतृत्व की सराहना की है, जिसकी कथित भड़काऊ टिप्पणियों ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि तैयार की थी। कांग्रेस नेता ने इस मुद्दे को भारत की कूटनीतिक चुनौती से जोड़ा।
भारत–अमेरिका व्यापार समझौते पर सवाल
रमेश ने भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर भी केंद्र सरकार की आलोचना की। उनका दावा है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक कूटनीति “बुरी तरह विफल” रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने अमेरिकी किसानों से आयात का वादा किया, जबकि बदले में केवल अस्पष्ट रियायतें मिलीं। उनके अनुसार, समझौते के कुछ ही दिनों बाद अमेरिका ने भारत से आने वाले सोलर मॉड्यूल पर 125.87% आयात शुल्क लगा दिया।
अंतरिम समझौते में भारत द्वारा अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं, खाद्य पदार्थों और कृषि उत्पादों पर शुल्क कम या समाप्त करने का प्रावधान है, जबकि अमेरिका ने कुछ भारतीय वस्तुओं पर 18 प्रतिशत का पारस्परिक शुल्क जारी रखा है, जिसे समझौते के पूर्ण क्रियान्वयन पर हटाने की बात कही गई है।
ट्रंप का बयान और बढ़ता क्षेत्रीय तनाव
यह विवाद तब और बढ़ा जब डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी तनाव में हस्तक्षेप करने पर विचार करने की बात कही। उन्होंने पाकिस्तान के नेतृत्व के साथ अपने “अच्छे संबंधों” पर जोर देते हुए वहां के प्रधानमंत्री और सैन्य नेतृत्व की प्रशंसा की।
काबुल और इस्लामाबाद के बीच हाल के दिनों में तनाव बढ़ा है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे पर जवाबी हमलों के आरोप लगा रहे हैं। इससे क्षेत्र में व्यापक सैन्य संघर्ष की आशंका जताई जा रही है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि प्रधानमंत्री अपने साधनों से पुरस्कार हासिल कर सकते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वास्तविकता कुछ और है।
कांग्रेस और भाजपा के बीच इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है, जबकि केंद्र सरकार की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।