भारत का रणनीतिक मित्र इज़रायल इन दिनों वेस्ट एशिया की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इसके चलते पाकिस्तान के करीबी तुर्किए की रणनीति बुरी तरह प्रभावित हुई है, और इस घटनाक्रम ने पाकिस्तान को भी परेशान कर दिया है।
तुर्किए का सपना: वेस्ट एशिया पर नियंत्रण और एस-400 की तैनाती
तुर्किए के राष्ट्रपति रेचप तैयब एर्दोगान लंबे समय से मिडिल ईस्ट में अपनी पकड़ मजबूत करने का सपना देख रहे थे। उनका इरादा सीरिया में एक स्थायी सैन्य अड्डा बनाकर वहां पर रूस निर्मित S-400 एयर डिफेंस सिस्टम तैनात करने का था। यह सिस्टम किसी भी हवाई हमले को रोकने में सक्षम माना जाता है और इज़रायल की सीरिया में होने वाली गतिविधियों के लिए बड़ा खतरा बन सकता था।
इज़रायल ने सीधे किया एक्शन, सैन्य ठिकानों पर हमला
तुर्किए की इस योजना को इज़रायल ने गंभीरता से लिया और तुरंत कार्रवाई की। 2 अप्रैल को इज़रायली फाइटर जेट्स ने T4 एयरबेस समेत कई ठिकानों को निशाना बनाया। रनवे, रडार सिस्टम और तुर्किए समर्थित सैन्य जमावड़ों को ध्वस्त कर दिया गया।
इस ऑपरेशन का मकसद स्पष्ट था – तुर्किए को चेतावनी देना कि सीरिया इज़रायल की रेड लाइन है।
HATS जैसे आतंकी संगठन भी बने निशाना
इस हमले में हयात तहरीर अल-शाम (HATS) जैसे संगठनों को भी निशाना बनाया गया जिन्हें पहले अल कायदा से जुड़ा माना जाता था और जिन पर तुर्किए के समर्थन का आरोप है। इज़रायल ने इस हमले के ज़रिए न सिर्फ तुर्किए, बल्कि ईरान और सीरिया को भी स्पष्ट संदेश दे दिया।
रूस की चुप्पी और तुर्किए की रणनीति की विफलता
इज़रायल के साथ सीरिया को लेकर रूस की सामरिक समझ के चलते तुर्किए इज़रायल के हमले का न तो जवाब दे पाया और न ही रूस से खुलकर समर्थन मांग सका। उसकी पूरी रणनीति अस्त-व्यस्त हो गई।
पाकिस्तान को लगी मिर्ची, संयुक्त राष्ट्र में खोला मोर्चा
तुर्किए की इस रणनीतिक हार के बाद पाकिस्तान की बेचैनी भी खुलकर सामने आई। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि ने इज़रायल के खिलाफ बयानबाज़ी की, हमला “बिना उकसावे” वाला बताया और 1974 के समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया।
इज़रायल-भारत मित्रता और रणनीतिक लाभ
पाकिस्तान को भले ही इज़रायल से समस्या हो, लेकिन भारत के लिए इज़रायल एक मजबूत रक्षा सहयोगी है। जब इज़रायल अपने दुश्मनों को कमजोर करता है, तो भारत के रणनीतिक हित भी सुरक्षित रहते हैं। यही कारण है कि पाकिस्तान की आलोचना के बावजूद भारत-इज़रायल संबंध लगातार मजबूत होते जा रहे हैं।