बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित संविधान संशोधन से धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलते रहेंगे, चाहे वे बहुसंख्यक हों या अल्पसंख्यक।
USCIRF से मुलाकात में दिया बड़ा बयान
यूनुस ने यह बयान यूएस इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम आयोग (USCIRF) के अध्यक्ष स्टीफन श्नेक से मुलाकात के दौरान दिया। उन्होंने कहा, “हम देश में धार्मिक सद्भाव बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।”
संविधान संशोधन पर बनी आम सहमति की कोशिश
यूनुस ने यह भी बताया कि संविधान संशोधन को लेकर राजनीतिक दलों के साथ संवाद चल रहा है। आम सहमति बनाने के लिए गठित आयोग विभिन्न पक्षों से विचार-विमर्श कर रहा है।
धार्मिक स्वतंत्रता की पूर्ण गारंटी
यूनुस ने भरोसा दिलाया कि देश में धर्म की आज़ादी हर नागरिक का मौलिक अधिकार रहेगा। उन्होंने कहा, “सरकार सभी धर्मों के प्रति समान दृष्टिकोण रखती है और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा हमारी प्राथमिकता है।”
अल्पसंख्यकों पर हिंसा के आरोपों पर दी सफाई
पिछले साल पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के हटने के बाद अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय पर हमले बढ़े थे। इन घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए यूनुस ने कहा, “अंतरिम सरकार पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है। हम वैश्विक पत्रकारों को आमंत्रित करते हैं कि वे आकर जमीनी हकीकत देखें।”