नई दिल्ली। भारत मंडपम में आयोजित ‘दिल्ली विश्व पुस्तक मेला’ इस बात का गवाह बना कि तकनीक के विस्तार के बावजूद किताबों के प्रति पाठकों का लगाव कम नहीं हुआ है। नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT) द्वारा आयोजित इस मेले में उमड़ी युवाओं की भारी भीड़ ने प्रकाशकों और लेखकों में नया उत्साह भर दिया है।
1. सोशल मीडिया: किताबों के लिए ‘खतरा’ नहीं बल्कि ‘सेतु’
अक्सर यह माना जाता है कि सोशल मीडिया के कारण पढ़ने की आदत खत्म हो रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना इसके उलट है। विशेषज्ञों के अनुसार:
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सोशल मीडिया ने युवाओं के बीच किताबों के प्रति जागरूकता और उत्सुकता बढ़ाई है।
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गंभीर पाठक हमेशा शोध और गहन अध्ययन में रुचि रखते हैं, और उनके लिए किताबों का कोई विकल्प नहीं है।
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स्क्रीन टाइम के मुकाबले अब लोग फिर से किताबों के पन्नों के साथ समय बिताना पसंद कर रहे हैं।
2. एआई (AI) बनाम मानवीय संवेदनाएं
आज के एआई युग में मशीनें किताबें तो लिख सकती हैं, लेकिन उनमें मानवीय भावनाओं की कमी है। ‘एनक्डोट पब्लिशिंग हाउस’ के निदेशक सागर आजाद का कहना है कि:
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किताबों के लिए लेखक की अपनी संवेदना और भावना जरूरी है, जो एआई कभी पैदा नहीं कर सकता।
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लेखन के विषयों में विविधता आई है; अब केवल प्रेम तक सीमित न रहकर मोटिवेशन, फिलॉसफी और आध्यात्मिकता पर भी खूब लिखा जा रहा है।
3. साहित्य के क्षेत्र में बढ़ती ‘नारी शक्ति’
इस बार के पुस्तक मेले में एक सुखद बदलाव देखने को मिला है—लेखिकाओं की बढ़ती संख्या। प्रकाशकों के अनुसार:
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आज के समय में बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा लड़कियां लेखन के क्षेत्र में कदम रख रही हैं।
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एक 16 वर्षीय युवा लेखिका द्वारा विभिन्न विषयों पर 10 से अधिक किताबें लिखना इस नए युग की एक बड़ी उपलब्धि है।
4. ‘पीएम-युवा’ और सरकारी प्रयास
पुरी लिटरेचर फेस्टिवल के संस्थापक निदेशक शशांक शेखर सिंह ने नेशनल बुक ट्रस्ट के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा:
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पीएम-युवा (PM-YUVA): इस तरह के कार्यक्रमों से नए लेखकों को एक मंच मिल रहा है।
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सांस्कृतिक सत्र: मेले के दौरान भारतीय सभ्यता, संस्कृति और वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत की भूमिका जैसे विषयों पर 10 से अधिक महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए।
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कार्यशालाएं: युवा लेखकों और प्रकाशकों के कौशल विकास के लिए कार्यशालाओं के आयोजन पर भी जोर दिया जा रहा है।