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सौरभ भारद्वाज पर निशाना: मोदी विरोधी नेता को BJP का टिकट?

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दिल्ली विधानसभा चुनाव इस बार बेहद रोमांचक हो गए हैं। जहां कांग्रेस कहीं नजर नहीं आ रही, वहीं बीजेपी अपनी नई रणनीतियों से सभी को चौंका रही है। अरविंद केजरीवाल के खिलाफ प्रवेश वर्मा और आतिशी के खिलाफ रमेश बिधूड़ी को उतारने के बाद अब बीजेपी सौरभ भारद्वाज को चुनौती देने के लिए एक मजबूत चेहरा उतारने की तैयारी में है।

स्मृति ईरानी को दिल्ली चुनाव में उतारने की चर्चा

सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी स्मृति ईरानी को दिल्ली कैंट या ग्रेटर कैलाश सीट से उम्मीदवार बना सकती है। उनकी एंट्री को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें दिल्ली का मुख्यमंत्री चेहरा भी बनाया जा सकता है। फिलहाल दिल्ली की सत्ता एक महिला मुख्यमंत्री के हाथ में है, और बीजेपी इस परिदृश्य को भुनाने के लिए स्मृति ईरानी को आगे कर सकती है।

अमेठी में जीत और हार का सफर

2019 में स्मृति ईरानी ने अमेठी में राहुल गांधी को हराकर अपनी छवि को मजबूत किया था। यह जीत उनके राजनीतिक कद को बढ़ाने में अहम साबित हुई। हालांकि, 2024 में लोकसभा चुनाव में उन्हें अमेठी में करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उनकी राजनीतिक सक्रियता कम हो गई और वो पब्लिक अपीयरेंस में भी कम नजर आईं।

दिल्ली चुनाव में क्यों अहम होंगी स्मृति ईरानी?

दिल्ली में बीजेपी के पास कोई बड़ा चेहरा नहीं है, और स्मृति ईरानी इस कमी को पूरा कर सकती हैं। उनका राजनीतिक अनुभव और महिला नेता के रूप में पहचान बीजेपी के लिए फायदेमंद हो सकती है।

स्मृति और नरेंद्र मोदी के बीच पुराना विवाद

एक समय था जब स्मृति ईरानी नरेंद्र मोदी की कट्टर आलोचक थीं। 2004 में उन्होंने गुजरात दंगों के लिए मोदी से इस्तीफा मांगते हुए अनशन करने की धमकी दी थी। हालांकि, समय के साथ उनका नजरिया बदला और 2014 के चुनाव प्रचार के दौरान वह मोदी की प्रशंसा करती नजर आईं।

महिला नेतृत्व का नया चेहरा?

दिल्ली ने पहले भी महिला मुख्यमंत्री देखी हैं, जैसे सुषमा स्वराज और शीला दीक्षित। अब बीजेपी स्मृति ईरानी को महिला मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट कर सकती है, जिससे उन्हें महिला वोटर्स को साधने में मदद मिलेगी।

बीजेपी की रणनीति का असर

दिल्ली में चुनावी मुकाबला दिलचस्प हो रहा है। बीजेपी की यह नई रणनीति आम आदमी पार्टी के नेताओं के खिलाफ कड़ी चुनौती पेश कर सकती है। अब देखना यह होगा कि स्मृति ईरानी का दिल्ली चुनाव में क्या रोल रहता है और क्या वे पार्टी की उम्मीदों पर खरी उतरेंगी।

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