केंद्र सरकार ने पूरे देश में वाहन फिटनेस टेस्ट शुल्क में बड़ा परिवर्तन किया है। नए नियमों के तहत पुराने, अधिक प्रदूषण फैलाने वाले और असुरक्षित वाहनों को सड़कों से हटाने के लिए आयु-आधारित शुल्क संरचना लागू की गई है। यह संशोधन केंद्रीय मोटर वाहन नियम (5वां संशोधन) के तहत प्रभावी हुआ है।
10 साल बाद ही लगेगी बढ़ी हुई फीस
11 नवंबर को जारी अधिसूचना के मुताबिक, अब से 10 वर्ष पुराने वाहनों पर बढ़ी हुई फीस लागू होगी, जबकि पहले यह सीमा 15 वर्ष थी। इससे पुराने वाहनों का उपयोग हतोत्साहित होगा।
तीन आयु-वर्गों में वाहन, उम्र बढ़ी तो शुल्क भी बढ़ा
सरकार ने वाहनों को तीन श्रेणियों में बांटा है:
10–15 वर्ष
15–20 वर्ष
20 वर्ष से अधिक
जैसे-जैसे वाहन की उम्र बढ़ेगी, शुल्क भी बढ़ता जाएगा।
20 साल पुराने व्यावसायिक वाहनों पर सबसे ज्यादा शुल्क
20+ साल पुराने वाहनों के लिए शुल्क में सबसे बड़ी बढ़ोतरी की गई है:
भारी माल वाहक / बसें: 3,500 से बढ़कर 25,000 रुपये
मध्यम वाणिज्यिक वाहन: 20,000 रुपये
हल्के मोटर वाहन (LMV): 10,000 से बढ़कर 15,000 रुपये
दोपहिया और तिपहिया पर भी बढ़ा बोझ
20 वर्ष पुराने दोपहिया: 600 से बढ़कर 2,000 रुपये
20 वर्ष पुराने तिपहिया: अब 7,000 रुपये शुल्क
नए वाहनों पर भी शुल्क में बढ़ोतरी
15 वर्ष से कम आयु वाले वाहनों पर अब शुल्क इस प्रकार है:
मोटरसाइकिल: 400 रुपये
LMV: 600 रुपये
मध्यम/भारी व्यावसायिक वाहन: 1,000 रुपये
नियमों में बदलाव का उद्देश्य
ये बदलाव पुराने वाहनों की रिटायरमेंट, प्रदूषण में कमी, और सड़क सुरक्षा बढ़ाने की सरकारी रणनीति का हिस्सा हैं।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में 10 साल पुराने डीज़ल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर जबरन कार्रवाई रोकने के निर्देश दिए थे। नई शुल्क संरचना ऐसे वाहनों को स्वैच्छिक रूप से हटाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।