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सोनम-राजा केस: क्या प्यार में हुई बेवफाई या साजिश?

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11 मई: इंदौर निवासी राजा रघुवंशी और सोनम की शादी हुई।

20 मई: दंपति हनीमून मनाने के लिए मेघालय रवाना हुए।

22 मई: दोनों सोहरा (चेरापूंजी) के नज़दीक मावलखियात गांव पहुंचे।

संदिग्ध गतिविधियाँ और गुमशुदगी

23 मई: दंपति को आखिरी बार गाइड अल्बर्ट पीडी ने देखा, उनके साथ तीन हिंदी भाषी पुरुष भी थे।

24 मई: उनका स्कूटर शिलांग-सोहरा रोड पर एक कैफे के पास लावारिस मिला।

शव की बरामदगी और सुराग

2 जून: राजा का शव वेइसाडोंग फॉल्स के पास गहरी खाई में मिला।

3 जून: पास से खून से सना चाकू मिला।

एक रेनकोट भी घटनास्थल के करीब बरामद हुआ, जो दंपति का माना जा रहा है।

पुलिस की जांच और खुलासा

मेघालय पुलिस के डीजीपी ने बताया कि सोनम ने गाजीपुर (उत्तर प्रदेश) में आत्मसमर्पण कर दिया।

तीन अन्य आरोपी भी पकड़े गए, जिनमें से दो इंदौर से और एक यूपी से गिरफ्तार हुआ।

आरोपियों ने खुलासा किया कि सोनम ने पति की हत्या के लिए उन्हें भाड़े पर बुलाया था।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और जांच की मांग

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले की CBI जांच के लिए गृहमंत्री अमित शाह से अनुरोध किया।

सोनम के पिता ने दावा किया कि उनकी बेटी का अपहरण हुआ है और मेघालय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

परिवार ने भी इस केस को CBI को सौंपने की मांग की है।

गाइड का बयान

गाइड अल्बर्ट के अनुसार, उन्होंने दंपति को तीन अन्य लोगों के साथ देखा था जो हिंदी में बात कर रहे थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे स्थानीय नहीं थे।

‘लिविंग रूट्स ब्रिज’ देखने के बजाय दंपति ने किसी अन्य गाइड की सेवा ली थी।

जांच जारी

एसआईटी की अध्यक्षता में एक विशेष दल पूरे मामले की जांच कर रहा है।

अब तक कुल चार गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, और एक आरोपी की तलाश अभी भी जारी है।

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