RSS News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि वर्तमान समय में दुनिया जिन संकटों और चुनौतियों का सामना कर रही है, उनका स्थायी समाधान भारत की समग्र और एकीकृत दृष्टि में निहित है। उन्होंने कहा कि विश्व को सही दिशा देना और उसे पूर्णता की ओर ले जाना भारत की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक भूमिका है।
भारत की बात दुनिया को सुननी होगी
भारतीय शिक्षण मंडल (BSM) की ओर से बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि भारत की सोच केवल किसी एक देश या समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समस्त मानवता और सभी प्राणियों के कल्याण की बात करती है।
उन्होंने कहा, “विश्व को पूर्णता प्रदान करने के लिए हमारी समग्र दृष्टि के आधार पर सभी प्राणियों के कल्याण हेतु भारत की बात सुनी जानी चाहिए। यह समय की आवश्यकता ही नहीं, बल्कि अपरिहार्य है।”
आंशिक सोच से नहीं सुलझेंगी वैश्विक समस्याएं
मोहन भागवत ने कहा कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्थाएं और विचारधाराएं केवल आंशिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती हैं। यही कारण है कि वे आज की जटिल चुनौतियों का स्थायी समाधान देने में सक्षम नहीं हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की समग्र जीवन-दृष्टि ही ऐसी सोच है, जो मानवता के समग्र विकास और वैश्विक कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
BSM की नई वेबसाइट का शुभारंभ
कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने भारतीय शिक्षण मंडल (BSM) की नई आधिकारिक वेबसाइट का शुभारंभ भी किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यम के जरिए संगठन की विचारधारा और शैक्षणिक गतिविधियों को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाया जा सकेगा।
देशभर से पहुंचे 380 प्रतिनिधि
तीन दिवसीय इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 380 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा और समग्र विकास जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
थावरचंद गहलोत ने किया था उद्घाटन
विज्ञप्ति के अनुसार, सम्मेलन का उद्घाटन शुक्रवार को कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने किया था। समापन सत्र में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।