दो साल के लंबे अंतराल के बाद, रविवार शाम को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत से मुलाकात की। यह मुलाकात लगभग 45 मिनट तक दिल्ली के झंडेवालान स्थित केशव कुंज में हुई। हालांकि शिवराज सिंह चौहान ने इस तरह की किसी भी मुलाकात से इनकार किया है।
बीजेपी अध्यक्ष पद की तलाश के बीच चर्चा तेज़
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भाजपा अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश में है। भागवत से मुलाकात से पहले चौहान भारत मंडपम में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में अपने कैबिनेट सहयोगी गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ मंच साझा कर रहे थे। मुलाकात के बाद वे सीधे मध्य प्रदेश रवाना हो गए।
चौहान का नाम फिर दौड़ में सबसे आगे
रविवार की इस मुलाकात के बाद से शिवराज सिंह चौहान का नाम भाजपा अध्यक्ष पद की दौड़ में फिर सबसे आगे बताया जा रहा है। चौहान भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्रियों में से एक रहे हैं, जिन्होंने 16 वर्षों से अधिक समय तक मध्य प्रदेश पर शासन किया।
हिंदी पट्टी में मजबूत पकड़
अपने लंबे कार्यकाल में चौहान ने भाजपा को हिंदी पट्टी में मज़बूत आधार दिया। उनकी तुलना गुजरात में नरेंद्र मोदी की राजनीतिक पकड़ से की जाती है। एक ओबीसी नेता होने के बावजूद उनकी अपील जातिगत सीमाओं से परे रही और उन्होंने कांग्रेस की परंपरागत बढ़त को कमज़ोर किया।
अध्यक्ष पद का चुनाव सितंबर में संभव
भाजपा और आरएसएस की योजना है कि 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कराया जाए। कोशिश है कि 28 सितंबर से पहले यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।
तीन दशकों से भाजपा का मज़बूत चेहरा
शिवराज सिंह चौहान तीन दशकों से भाजपा का प्रमुख चेहरा रहे हैं। आरएसएस और भारतीय जनता युवा मोर्चा से राजनीतिक सफर शुरू करने वाले चौहान 1990 के दशक में तेजी से उभरे। 2005 में मुख्यमंत्री पद पर उनकी नियुक्ति ने मध्य प्रदेश की राजनीति और भाजपा संगठन को एक नया आयाम दिया।