Shiv Shankar Damru Dhari Hai Jag Ke Aadhar Lyrics: भगवान शिव को समर्पित यह लोकप्रिय भजन उनकी महिमा, करुणा और भक्तों पर बरसने वाली कृपा का गुणगान करता है। आप इस भजन को शिव पूजा, रुद्राभिषेक, सावन माह या किसी भी धार्मिक अवसर पर गाकर अथवा सुनकर भगवान भोलेनाथ का स्मरण कर सकते हैं।
शिव शंकर डमरू धारी, है जग के आधार
शिव शंकर डमरू धारी,
है जग के आधार,
तीनों लोक पर रहता है,
उनका ही अधिकार।
शिव शंकर डमरू धारी,
है जग के आधार॥
शिव हैं सृष्टि के संचालक
शिवजी ही सृष्टि संचालक हैं,
शिवजी कण-कण में व्यापक हैं।
ये शिव शंकर कैलाशी हैं,
ये शिवजी काशीवासी हैं।
इनके हाथों में है त्रिभुवन,
सब देवों पर इनका शासन।
ये भोले जो हैं शिव शंकर,
सब करते हैं इनका आदर।
महादेव शिव भोले हैं,
देवों के सरदार,
शिव शंकर डमरू धारी,
है जग के आधार॥
शिव स्मरण का महत्व
शिव का सिमरन है फलदायी,
शिव का सिमरन है सुखदायी।
शिव जाप से शांति मिलती है,
शिव जाप से मुक्ति मिलती है।
शिव भोले बड़े दयालु हैं,
शिव भोले बड़े कृपालु हैं।
भक्तों पर मेहर वो करते हैं,
शिव झोलियाँ सबकी भरते हैं।
शिव के जैसा कोई नहीं,
दानी और दातार,
शिव शंकर डमरू धारी,
है जग के आधार॥
शिव की शरण में सब समान
वो निर्धन हो या कोई धनी,
इस बात से फर्क नहीं कोई।
वो रंक हो या कोई राजा,
यहाँ कोई नहीं है छोटा-बड़ा।
शिव की जो शरण में आते हैं,
वो कभी निराश न जाते हैं।
शिव सब पर करते हैं कृपा,
मिलता है सबको प्यार उनका।
महाकाल महादेव जी हैं,
सबके तारणहार,
शिव शंकर डमरू धारी,
है जग के आधार॥
मोक्ष के दाता हैं महादेव
जीवन-मृत्यु के अधिकारी,
हैं यही तो भोले भंडारी।
हैं मोक्ष के दाता शिव शंकर,
हैं जगत पिता ये नागेश्वर।
भोले ही भाग्य विधाता हैं,
शिव सर्वगुणी और ज्ञाता हैं।
शिव सिमरन से हर पाप धुले,
शिव की इच्छा से स्वर्ग मिले।
शिव के एक इशारे पर,
खुलते मोक्ष के द्वार,
शिव शंकर डमरू धारी,
है जग के आधार॥
अंत समय में शिव ही सहारा
जब अंत समय आ जाता है,
और जीव बहुत घबराता है।
जब प्राण पखेरू उड़ता है,
जीवन मृत्यु से जुड़ता है।
निर्जीव हो जाती है काया,
मंडराती है मृत्यु की छाया।
तब शिव ही सहारा देते हैं,
नैया को किनारा देते हैं।
भवसागर से नैया को,
शिव ही लगाते पार,
शिव शंकर डमरू धारी,
है जग के आधार॥
भक्त की प्रार्थना
हम भोले भक्त तुम्हारे हैं,
हम मांगते आए द्वारे हैं।
हे महादेव, हे शिव शंकर,
कुछ दया करो हम दुखियों पर।
हम सब दुख-दर्द के मारे हैं,
हम आए द्वार तुम्हारे हैं।
अरदास है तुमसे बस इतनी,
सुन लो ऐ भोले भंडारी।
हम पर भी कृपा करना,
हे जग के करतार,
शिव शंकर डमरू धारी,
है जग के आधार॥
भजन का समापन
शिव शंकर डमरू धारी,
है जग के आधार,
तीनों लोक पर रहता है,
उनका ही अधिकार।
शिव शंकर डमरू धारी,
है जग के आधार॥