शिवसेना UBT ने सोमवार को सामना के संपादकीय में कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए इंडिया ब्लॉक और महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी के भविष्य पर सवाल खड़े किए। संपादकीय में लिखा गया कि देश में इंडिया ब्लॉक और राज्य में महा विकास अघाड़ी कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं।
संपादकीय ने कहा, “हर क्षेत्रीय पार्टी को अपनी भूमिका, कैडर और अस्तित्व बनाए रखना होता है, लेकिन कांग्रेस इस बात को समझने के लिए तैयार नहीं है। कांग्रेस कई राज्यों में अपने दम पर लड़ने में असमर्थ है और इसे क्षेत्रीय दलों के साथ मजबूती से खड़ा रहना होगा।”
संजय राउत ने व्यक्त की चिंता
शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने भी इंडिया ब्लॉक की समन्वयहीनता और नेतृत्व की कमी को लेकर चिंता जाहिर की। राउत ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि गठबंधन के भविष्य पर स्पष्टता का अभाव है।
उन्होंने कहा, “लोकसभा चुनावों के बाद से इंडिया ब्लॉक के नेताओं के बीच कोई सामूहिक बैठक या संवाद नहीं हुआ है। यह गठबंधन की एकता के लिए खतरनाक है।”
क्षेत्रीय नेताओं की बढ़ती चिंताएं
राउत ने ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि गठबंधन का अस्तित्व सवालों के घेरे में है। उन्होंने कहा, “इन नेताओं ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इंडिया ब्लॉक अब अस्तित्वहीन होता जा रहा है। अगर यह गठबंधन टूटता है, तो इसे संभालना मुश्किल होगा।”
कांग्रेस की भूमिका पर सवाल
राउत ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “अगर गठबंधन टूटता है, तो इसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी कांग्रेस की होगी। किसी भी तरह की चर्चा, समन्वय या संवाद का अभाव गठबंधन की कमजोरी को दर्शाता है।”
शिवसेना UBT और अन्य क्षेत्रीय दलों की चिंताओं ने इंडिया ब्लॉक और महा विकास अघाड़ी की रणनीति और एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आगामी चुनावों में इस गठबंधन की ताकत और समन्वय ही इसका भविष्य तय करेंगे।