शनि जयंती 27 मई यानी मंगलवार को मनाई जाएगी। माना जाता है कि ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनिदेव का अवतरण हुआ था। सूर्य देव और छाया देवी के पुत्र शनिदेव कर्म और न्याय के देवता हैं। और वह प्रसन्न हो तो अपने भक्तों का कुछ भी अनिष्ट नहीं होने देते हैं। वहीं माना जाता है कि पीपल की जड़ों में शनिदेव का वास होता है। ऐसे में शनि जयंती के दिन पीपल से जुड़े कुछ उपायों को करके शनिदेव की कृपा पाई जा सकती है। साथ ही शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से जूझ रहे जातकों को भी राहत मिल सकती है। वहीं हिंदू धर्म में पीपल को पवित्र वृक्ष माना गया है। इसकी पूजा का विशेष महत्व है। इस पर भी शनि देव और पीपल का गहरा संबंध माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि पीपल की पूजा से शनि के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं। इसके साथ ही सुख-समृद्धि बढ़ती है और कर्ज से मुक्ति मिलती है।
शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए पीपल पर जल चढ़ाएं
शनि जयंती के दिन सुबह स्नान ध्यान आदि करने के बाद पीपल की जड़ में कच्चा दूध, गंगाजल और साफ जल चढ़ाएं। इस दौरान 11 बार ऊं शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जप करें। माना जाता है कि इससे शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या में राहत मिलती है। अभी मेष, कुंभ और मीन राशि के जातकों की साढ़ेसाती और सिंह व धनु की ढैय्या चल रही है। ऐसे में इस उपाय से उनके जीवन में स्थिरता आएगी।
शनि जयंती की शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीया जलाएं। दीये में काले तिल और एक रुपये का सिक्का डाल दें। इसके बाद पीपल के चारों और सात बार परिक्रमा करें। माना जाता है कि इससे व्यक्ति की जिंदगी में व्याप्त अंधकार दूर होता है और वह अपने विरोधियों पर विजय प्राप्त करता है। साथ ही ऐसे व्यक्ति पर शनिदेव की कृपा बनी रहती है।
अगर आपकी कुंडली में किसी तरह का शनि दोष है या शनि की महादशा, अंतर्दशा चल रही है या कुंडली में शनि प्रतिकूल स्थिति में बैठे हैं तो शनि जयंती के दिन पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा करें। इस दौरान 108 बार ऊं नमः शिवाय मंत्र का जप करें। माना जाता है कि ऐसा करने से न सिर्फ कुंडली में व्याप्त शनि दोष दूर होते हैं बल्कि व्यक्ति की आयु और सेहत में भी वृद्धि होती है।
शनि जयंती के दिन पीपल के 11 पत्तों पर हल्दी से ऊं शं शनैश्चराय नमः मंत्र लिखें और उसे पीपल की जड़ पर रख दें। माना जाता है कि इससे अटके हुए काम बनने लगते हैं और धन संकट दूर होता है। इसके साथ ही शनि जयंती के दिन पीपल के नीचे बैठकर 7 बार हनुमान चालीसा पढ़ने से भय, दुर्घटना और काले जादू से सुरक्षा प्राप्त होती है।
पितृ दोष से परेशान हैं तो शनि जयंती के दिन का पीपल की जड़ में तिल, गुड़ और एक रुपये का सिक्का रखकर 11 बार ऊं प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम: मंत्र बोलें। इसके साथ ही पीपल के पेड़ पर रक्षा सूत्र या मौली बांधें। माना जाता है कि ऐसा करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। पितृ दोष शांत होते हैं और कर्मों का फल अच्छा मिलता है।