दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal और आम आदमी पार्टी के नेता Manish Sisodia ने दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ Supreme Court of India का दरवाजा खटखटाया है। दोनों नेताओं ने उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें Delhi High Court के मुख्य न्यायाधीश ने सीबीआई की याचिका को किसी अन्य जज के पास ट्रांसफर करने से इनकार कर दिया था।
दरअसल, यह मामला दिल्ली की 2021 की उत्पाद शुल्क (एक्साइज) नीति से जुड़ा है, जिसकी जांच Central Bureau of Investigation कर रही है।
जज बदलने की मांग खारिज
केजरीवाल और सिसोदिया ने 11 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश Devendra Kumar Upadhyaya को आवेदन देकर अनुरोध किया था कि सीबीआई की याचिका को Justice Swarna Kanta Sharma की पीठ से हटाकर किसी अन्य जज को सौंप दिया जाए।
दोनों नेताओं ने सुनवाई को लेकर निष्पक्षता पर गंभीर आशंका जताई थी। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि मामला वर्तमान रोस्टर के अनुसार ही सूचीबद्ध है और इसे स्थानांतरित करने का कोई प्रशासनिक आधार नहीं है।
क्या है पूरा मामला
सीबीआई की याचिका 16 मार्च को जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध है। इस याचिका में निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें 27 फरवरी को केजरीवाल, सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को बरी कर दिया गया था।
सीबीआई का आरोप है कि दिल्ली की 2021 की एक्साइज नीति के तहत शराब लाइसेंसधारियों को कथित तौर पर अनुचित लाभ दिया गया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।
जांच और निचली अदालत का फैसला
2021 की एक्साइज नीति का उद्देश्य शराब की बिक्री में निजी भागीदारी बढ़ाकर राजस्व बढ़ाना था, लेकिन बाद में इसमें अनियमितताओं, रिश्वतखोरी और वित्तीय नुकसान के आरोप लगे। इसके बाद उपराज्यपाल के आदेश पर सीबीआई और ईडी ने जांच शुरू की।
हालांकि निचली अदालत ने सीबीआई की जांच पर सवाल उठाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया था।
केजरीवाल की आपत्ति
केजरीवाल ने अपनी याचिका में कहा कि जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने 9 मार्च को बिना आरोपियों की दलील सुने निचली अदालत की टिप्पणियों पर रोक लगाने का आदेश दिया, जो निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांत के खिलाफ है।
वहीं मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि रोस्टर के अनुसार मामला उसी पीठ को सौंपा गया है और किसी जज को मामले से अलग होने का निर्णय स्वयं जज ही लेते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में अब आगे की सुनवाई
अब अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका में मांग की गई है कि मामले की पूरी तरह निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए इसे तत्काल सूचीबद्ध किया जाए।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब दिल्ली की एक्साइज नीति से जुड़ा मामला देश के सबसे चर्चित राजनीतिक और कानूनी विवादों में शामिल है। आम आदमी पार्टी इसे न्यायिक निष्पक्षता का मुद्दा बता रही है, जबकि जांच एजेंसियां इसे भ्रष्टाचार से जुड़ा बड़ा मामला मान रही हैं।