भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव, कूटनीतिक दूरी और तीखी बयानबाजी के बावजूद दोनों देशों के कुछ प्रमुख प्रतिनिधियों ने हाल के दिनों में अनौपचारिक संवाद की नई पहल की है। कोलंबो और बैंकॉक में आयोजित ट्रैक-टू वार्ताओं में दोनों देशों के रणनीतिक विशेषज्ञों, पूर्व राजनयिकों, सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों, शिक्षाविदों और मीडिया प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
क्या है ट्रैक-टू डिप्लोमेसी?
ट्रैक-टू डिप्लोमेसी ऐसी अनौपचारिक वार्ता प्रक्रिया होती है, जिसमें सरकारी प्रतिनिधि सीधे शामिल नहीं होते। इसके बजाय विशेषज्ञ, पूर्व अधिकारी और नीति मामलों के जानकार संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा करते हैं।
इन बैठकों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संवाद के रास्ते खुले रखना और तनावपूर्ण परिस्थितियों में संकट प्रबंधन के उपाय तलाशना था।
कोलंबो और बैंकॉक में हुई अहम बैठकें
सूत्रों के अनुसार, हालिया दौर की बैठकों का आयोजन श्रीलंका की राजधानी कोलंबो और थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में किया गया। इससे पहले दोहा और पश्चिम एशिया के कुछ अन्य शहरों में भी इसी तरह की वार्ताएं हो चुकी हैं।
बताया जा रहा है कि ये बातचीत सरकारी स्तर पर नहीं थी, लेकिन दोनों देशों की सरकारों को इसकी जानकारी थी।
किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
इन अनौपचारिक बैठकों में कई संवेदनशील विषयों पर खुलकर विचार-विमर्श किया गया। प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे:
आतंकवाद
सीमा पर तनाव
जल विवाद
क्षेत्रीय सुरक्षा
विश्वास बहाली के उपाय
दोनों पक्षों ने इस बात पर भी चर्चा की कि ट्रैक-टू वार्ताओं से निकले सुझावों को भविष्य में औपचारिक वार्ताओं तक कैसे पहुंचाया जा सकता है।
पहलगाम हमले के बाद बढ़ी पहल
मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद दोनों देशों के बीच हुए सैन्य तनाव के बाद इस तरह की अनौपचारिक बैठकों का सिलसिला तेज हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवाद प्रत्यक्ष वार्ता बंद होने की स्थिति में संपर्क बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं।
संघ नेताओं के बयान के बाद बढ़ी चर्चा
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद के रास्ते खुले रखने की बात कही थी।
उन्होंने दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क और संवाद बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया था।
औपचारिक बातचीत की संभावना अभी कम
नई दिल्ली के कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि ट्रैक-टू वार्ताओं के बावजूद निकट भविष्य में दोनों देशों के बीच औपचारिक सरकारी बातचीत शुरू होने की संभावना फिलहाल बेहद कम है।
भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि आतंकवाद जारी रहने तक पाकिस्तान के साथ सार्थक संवाद संभव नहीं है।
2019 के बाद और ठंडे पड़े रिश्ते
साल 2019 के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में और अधिक गिरावट आई है।
वर्तमान स्थिति में:
दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग नगण्य है।
राजनयिक मिशन सीमित क्षमता के साथ काम कर रहे हैं।
लोगों के बीच संपर्क काफी कम हो गया है।
औपचारिक संवाद पूरी तरह ठप है।
कभी आठ प्रमुख मुद्दों पर होती थी नियमित वार्ता
एक समय भारत और पाकिस्तान के बीच आठ प्रमुख विषयों पर नियमित बातचीत होती थी। इनमें शामिल थे:
शांति और सुरक्षा
विश्वास बहाली उपाय
जम्मू-कश्मीर
सियाचिन
वुलर बैराज
सर क्रीक विवाद
आर्थिक सहयोग
आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी
हालांकि 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद यह प्रक्रिया रोक दी गई थी।
कई बार शुरू हुई, फिर पटरी से उतरी वार्ता
2011 में दोनों देशों के बीच वार्ता फिर शुरू हुई, लेकिन 2013 में नियंत्रण रेखा पर भारतीय सैनिकों की हत्या के बाद इसे दोबारा स्थगित कर दिया गया।
इसके बाद दिसंबर 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लाहौर यात्रा के दौरान व्यापक द्विपक्षीय वार्ता शुरू करने पर सहमति बनी थी। लेकिन 2016 में पठानकोट एयरबेस सहित कई आतंकी हमलों के बाद यह प्रक्रिया फिर रुक गई।
क्या संकेत देती है यह पहल?
हालिया ट्रैक-टू वार्ताएं यह संकेत देती हैं कि आधिकारिक स्तर पर संबंधों में जमी बर्फ के बावजूद दोनों देशों के कुछ प्रभावशाली वर्ग संवाद और तनाव कम करने के विकल्प तलाश रहे हैं।
हालांकि भारत और पाकिस्तान की सरकारों ने इन बैठकों पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन दक्षिण एशिया में स्थिरता और शांति बनाए रखने की दिशा में इन प्रयासों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।