सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधन कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि जब तक किसी कानून में स्पष्ट रूप से असंवैधानिकता न हो, तब तक अदालतें उसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं। मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायमूर्ति बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह ने कहा कि “किसी भी कानून को संवैधानिक मान्यता प्राप्त होती है और यही हमें कॉलेज में सिखाया गया है… अन्यथा हम जानते हैं कि क्या हो रहा है।”
केंद्र का आश्वासन और कोई अंतरिम निर्देश नहीं
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया कि वह वक्फ संपत्तियों को ‘गैर-अधिसूचित’ नहीं करेगी, जिनमें वे संपत्तियां भी शामिल हैं जो ‘वक्फ बाय यूजर’ श्रेणी में आती हैं। इसके अलावा, केंद्र ने कहा कि वह फिलहाल केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में कोई नई नियुक्ति नहीं करेगा।
क्या है ‘वक्फ बाय यूजर’ प्रावधान?
‘वक्फ बाय यूजर’ का तात्पर्य है ऐसी संपत्तियां जिन्हें वर्षों से धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जा रहा है — भले ही उनके पास कोई औपचारिक दस्तावेज़ न हो — फिर भी उन्हें वक्फ संपत्ति माना जा सकता है। इस प्रावधान को लेकर कई पक्षों ने चिंता जताई है।