भारत में 1975 से 1977 तक का आपातकाल एक ऐसा दौर था जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आंतरिक और बाहरी खतरों का हवाला देते हुए पूरे देश में आपातकाल की घोषणा कर दी थी।
25 जून 1975 को राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद द्वारा संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत इसे लागू किया गया, जो 21 मार्च 1977 तक जारी रहा। इस दौरान प्रधानमंत्री को डिक्री के माध्यम से शासन का अधिकार मिल गया, चुनाव रद्द कर दिए गए और नागरिक स्वतंत्रताओं को निलंबित कर दिया गया।
सिंधिया का कांग्रेस पर तीखा हमला
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर कांग्रेस और विशेष रूप से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर परोक्ष रूप से निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “जो लोग संविधान की प्रति लेकर घूमते हैं, उन्हें हर वर्ष 25 जून को पश्चाताप करना चाहिए।”
उन्होंने यह बयान मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, ग्वालियर पीठ परिसर में बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा लगाने की मांग को लेकर कांग्रेस के विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए दिया।
“कांग्रेस ने ही आंबेडकर का अपमान किया था” – सिंधिया
सिंधिया ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के विरुद्ध उम्मीदवार खड़ा कर उन्हें चुनाव में हराया और बाद में अपनी मंत्रिपरिषद से भी अलग कर दिया। उन्होंने कहा:”जिस पार्टी ने 25 जून 1975 को संविधान को पैरों तले रौंदा, वह आज संविधान की बात कर रही है।”उन्होंने यह भी जोड़ा,”संविधान को केवल हाथ में लेकर घूमने से नहीं, बल्कि आत्मा में जीवित रखने से उसकी रक्षा होती है।”
कांग्रेस का संविधान सत्याग्रह और बीजेपी की प्रतिक्रिया
कांग्रेस पार्टी ने 25 जून को ‘संविधान सत्याग्रह’ के तहत एक दिवसीय भूख हड़ताल की घोषणा की है। यह प्रदर्शन ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में आंबेडकर की प्रतिमा स्थापना की मांग को लेकर किया जा रहा है।
इस अभियान को देशभर में जन-जागरण के रूप में चलाया जा रहा है। वहीं, राज्य सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा:”कांग्रेस का संविधान सत्याग्रह केवल ढकोसला और वोट बैंक की राजनीति है।”
“बीजेपी संविधान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध”
सारंग ने कांग्रेस पर ऐतिहासिक रूप से डॉ. आंबेडकर का तिरस्कार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि नेहरू और कांग्रेस ने आंबेडकर को लोकसभा में प्रवेश तक से वंचित रखा।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जब-तब हठधर्मी निर्णय लेकर संविधान को कमजोर किया है, जबकि आज की बीजेपी सरकार संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।